राधा का प्रेम
राधा चरणों में मिले, जीवन को उद्धार ।
राधा नाम पुकारते, खिल उठते हैं धाम,
राधा के बिन श्याम भी, हो जाते गुमनाम ।
बरसाने को मिल गई, आज प्रेम की छांव,
राधा जन्मी थीं जहां, धन्य हुआ वह गांव ।
मांगा ना कोई राज पाट, ना मांगा संसार,
राधा ने तो प्रेम को ही, माना जीवन सार ।
राधा केवल नाम नहीं, ये भक्ति की पहचान ,
राधा भाव जो जगे हृदय,फिर मिट जाता अभिमान ।
जिस उर में हो प्रेम की, निर्मल सी बरसात,
उस उर में हरपल रहे, राधा- श्याम का साथ ।
द्वेष मिटे, अभिमान मिटे, मिट जाए हर भेद,
राधा भाव सिखलाता है, प्रेम ही सच्चा वेद ।
जिसके अधरों पर राधा, उसके मन में धाम,
जिसके हृदय में प्रेम में, उसके हृदय में श्याम ।
राधा- राधा नाम में, शक्ति अपरम्पार,
जो राधा सुमिरन करे, भव से उतरे पार ।
धन और दौलत तुच्छ है, और तुच्छ सम्मान,
जिसके हृदय राधा बसे,वही सच्चा धनवान ।
प्रेम जहां निष्काम हो, त्याग जहां आधार,
वहीं राधा मुस्कान बन, करतीं हृदय श्रृंगार ।
श्याम मिले तो राधिका, राधा मिले तो श्याम,
दो तन सबको दिख रहे, पर एक ही है परिणाम ।
कृपा करो हे राधिका धरो ‘संजू’ सिर पर हाथ,
दोनों ‘कर’ को जोड़कर “संजू” नवाए माथ ॥
डॉo संजुला सिंह “संजू”
जमशेदपुर
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