शिक्षा का आशय सिर्फ रोजगार प्राप्त करना नहीं है अपितु राष्ट्र और समाज के जिम्मेदार नागरिक – डॉ राकेश
कुशीनगर -बीएड विभाग बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर द्वारा आयोजित दीक्षारंभ कार्यक्रम में अभाविप गोरक्ष प्रांत के प्रांत अध्यक्ष डॉ राकेश प्रताप सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यारंभ संस्कार हमारे षोडश संस्कारों का अनिवार्य अंग है। वैदिक काल में शिक्षा की शुरुआत उपनयन संस्कार के द्वारा होती थी। हमारे यहां सभी मनीषियों ने शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डाला है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि शिक्षा अंतर्निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति है। इसका आशय है कि शिक्षा एक व्यक्ति के रूप में हमें पूर्णता प्रदान करती है। हमें व्यक्तित्व के बहुआयामी विकास पर बल देना चाहिए।शिक्षा का आशय सिर्फ रोजगार प्राप्त करना नहीं है अपितु राष्ट्र और समाज के जिम्मेदार नागरिक के रूप अपनी भूमिका के निर्वहन हेतु स्वयं को तैयार भी करना है। शिक्षक शिक्षा के छात्र के रूप में आपकी जिम्मेदारी इस रूप अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वीरेंद्र सिंह अहलूवालिया ने कहा कि बीएड प्रशिक्षु के रूप आप भारत के भविष्य का निर्माण करने वाले सबसे प्रभावशाली वर्ग शिक्षक के रूप में तैयार हो रहे हैं।इस दृष्टि से आपका शिक्षण और प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत प्रभावशाली और उपादेय होना चाहिए।इसीलिए आप सभी मन लगाकर प्रशिक्षण प्राप्त करें और अपने परिवार,संस्था और समाज का नाम रोशन करें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य प्रो विनोद मोहन मिश्र ने महाविद्यालय के आदर्श वाक्य योगः कर्मशु कौशलम की व्याख्या करते हुए बताया कि उद्योग या परिश्रम से समस्त कार्यों की सिद्धि प्राप्त की जा सकती है।अभ्यास से जीवन में पूर्णता आती है।अतः छात्र के रूप में आप सभी खुश मन लगाकर पढ़ाई करे और परिश्रम करते हुए अपने अभीष्ट लक्ष्य को प्राप्त करें। इस अवसर पर डॉ चंद्रप्रकाश सिंह ने भी अपना विचार साझा किया।
