ड्रैगन फ्रूट की खेती से बदली तकदीर: किसान श्री देव नारायण बने आत्मनिर्भरता की मिसाल
अमेठी- उत्तर प्रदेश सरकार की किसानोन्मुखी नीतियों, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय प्रशासन के मार्गदर्शन का परिणाम अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। जनपद अमेठी के विकास खण्ड बाजार शुकुल के ग्राम मण्डवा निवासी प्रगतिशील किसान श्री देव नारायण ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही दिशा, तकनीक और योजनाओं का लाभ मिले तो खेती न केवल आत्मनिर्भर बना सकती है बल्कि आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार भी बन सकती है।यह सफलता कहानी प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस मंशा को साकार करती है, जिसमें किसानों की आय दोगुनी करने, आधुनिक खेती को बढ़ावा देने तथा परंपरागत खेती से आगे बढ़कर नवाचार अपनाने पर जोर दिया गया है। इसी क्रम में जनपद स्तर पर जिलाधिकारी संजय चौहान के निर्देशन एवं मार्गदर्शन तथा जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह के प्रभावी क्रियान्वयन ने इस सफलता को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
योजना का लाभ और नई शुरुआत-
श्री देव नारायण ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) योजना के अंतर्गत ऑनलाइन पंजीकरण कराकर 0.50 हेक्टेयर भूमि में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। यह निर्णय उनके लिए एक नया और साहसिक कदम था, क्योंकि क्षेत्र में पारंपरिक खेती ही अधिक प्रचलित थी। लेकिन उन्होंने जोखिम उठाया और आधुनिक खेती की दिशा में आगे बढ़े।
उद्यान विभाग द्वारा उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, पौधों की उपलब्धता तथा आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” माइक्रोइरीगेशन योजना के अंतर्गत उनके खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित कराई गई, जिससे पानी की बचत के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार हुआ।
तकनीकी खेती से बढ़ी उत्पादकता-
ड्रैगन फ्रूट की खेती में वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाते हुए श्री देव नारायण ने पौधों की देखभाल, उर्वरक प्रबंधन और सिंचाई का विशेष ध्यान रखा। ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पौधों को आवश्यकतानुसार पानी और पोषक तत्व मिलते रहे, जिससे पौधों का विकास बेहतर हुआ। लगातार तीन वर्षों की मेहनत और धैर्य के बाद उनके खेत में पहली बार ड्रैगन फ्रूट की तुड़ाई हुई। इस दौरान लगभग 50 कुन्तल ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हुआ, जिसे उन्होंने खेत से ही करीब 5 लाख रुपये में बेच दिया। यह उनके लिए एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि थी।इंटरक्रॉपिंग से बढ़ी आमदनी-
श्री देव नारायण ने अपनी आय को और अधिक बढ़ाने के लिए इंटरक्रॉपिंग का सहारा लिया। ड्रैगन फ्रूट के साथ-साथ उन्होंने स्ट्रॉबेरी, बैंगन, टमाटर और हरी मिर्च जैसी फसलों की खेती भी की। इन सहायक फसलों से उन्हें लगभग 3 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। इस प्रकार उन्होंने एक ही खेत से बहुआयामी खेती का मॉडल प्रस्तुत किया, जिससे उनकी कुल आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। सभी खर्चों को निकालने के बाद उन्हें लगभग 5.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक है।
प्रशासनिक सहयोग बना सफलता की कुंजी-
इस सफलता के पीछे जिला प्रशासन की सक्रिय भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। जिलाधिकारी संजय चौहान के नेतृत्व में किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराने, उन्हें जागरूक करने और आधुनिक तकनीकों से जोड़ने का कार्य लगातार किया जा रहा है। वहीं जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह द्वारा योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया। किसानों को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए गए।
प्रेरणा स्रोत बने देव नारायण-
आज श्री देव नारायण अपने क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं। उनकी सफलता को देखकर आसपास के किसान भी अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ड्रैगन फ्रूट और अन्य उन्नत फसलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उनका मानना है कि यदि किसान सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ लें और नई तकनीकों को अपनाएं, तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि लाभ का मजबूत माध्यम बन सकती है।
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