गेहूं की अगती बुआई व हैप्पी सीडर /जीरो टिलेज तकनीक की सफलता पर प्रक्षेत्र दिवस
भाटपाररानी -अंतर्राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान – दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आइसार्क), वाराणसी, कृषि विज्ञानं केंद्र मल्हना, देवरिया व उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से पूर्वी उत्तर प्रदेश में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी पहल के तहत आज देवरिया जिले के ग्राम लेबकनी में प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर केंद्र के अध्यक्ष डॉ मांधाता सिंह ने समेकित पौषक तत्व प्रबंधन, इरी के डॉ अजय पुंडीर ने समेकित खरपतवार प्रबंधन एवं कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ कमलेश मीना ने सिंचाई प्रबंधन पर विस्तार पूर्वक बताया।
इस वर्ष किसानों के खेतों पर धान की सीधी बुवाई के बाद गेहूं की प्रजाति DBW 187, DBW 303 एवं HD 3406 की बुवाई गई थी। जिनकी 17 हेक्टयार में में 19 किसानों के यहां नवम्बर के प्रथम सप्ताह में बुवाई कराई गयीं थी जिससे गेहूं की खेती में श्रम और समय की बचत के साथ ही उत्पादन भी अच्छा मिला है। फसल के प्रदर्शन का आंकलन हेतु एक सार्वजनिक कटाई कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमे गेहूं की उपज 5.9 टन प्रति हेक्टेयर रही।
इरी द्वारा यंत्रीकृत, धान की सीधी बुवाई, गेहूं की शून्य जुताई विधि से अगेती बुवाई को बढ़ावा देने के लिए यह कार्यक्रम रखा गया था। प्रगतिशील किसान श्री मोहन पाठक ने बताया कि इरी एवं कृषि विज्ञान केंद्र मल्हना के वैज्ञानिकों द्वारा समय समय पर दिय गए सुझावों के बाद गेंहू के फसल प्रदर्शन से गांव के सभी किसान काफी संतुष्ट है।
उन्होंने यह भी बताया कि उत्पादन लागत में कमी आई है और अब गेहूं की समय से सीधी बुवाई करने की इच्छा रखते हैं। इस अवसर पर जन्मेजय , संजय यादव, ऋषभ शर्मा, उदय सिंह के साथ -साथ किसान मोहन पाठक, आध्या पाण्डेय, गंगेश पाठक, सुनील गोंड, अजय राय, विजेंदर राय, सुदामा, अशोक तिवारी, चंद्रभान यादव, वेदप्रकाश राय, ममता देवी आदि उपस्थित रहे।
