’’भारतीय ज्ञान और संस्कृति के संवाहक हैं हमारे संग्रहालय’’
गोरखपुरः-राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा आयोजित ’’हमारे संग्रहालयः भारतीय ज्ञान का वातायन’’ दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह कार्यशाला का आज पूर्वान्ह 11ः00 बजे यशोधरा सभागार में प्रो0 पूनम टंडन, कुलपति, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर द्वारा शुभारम्भ हुआ। प्रो0 पूनम टंडन जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि संग्रहालय किसी देश की संस्कृति, इतिहास एवं सभ्यता को जानने व समझने का एक सशक्त एवं प्रमाणिक माध्यम होते हैं। राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी सह कार्यशाला संग्रहलयों के महत्व से प्रतिभागियों को परिचित कराने में अहम भूमिका निभाएगी संग्रहालय का यह प्रयास अद्भुत है। बौद्ध संग्रहालय द्वारा निरन्तर अपनी शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति एवं विरासत को युवाओं तक पहुॅचाने का संकल्प प्रशंसनीय है। बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर एक प्रमुख पर्यटन एवं शैक्षिक स्थल के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हुआ है। पुरातत्व, इतिहास, भूगोल, जन्तुविज्ञान, पालि, संस्कृत, दर्शन, शिक्षा शास्त्र आदि विषयों के छात्र-छात्राओं के लिए निरन्तर परिस्कृत मंच उपलब्ध कराने में बौद्ध संग्रहालय अपनी अहम भूमिका निभा रहा है।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ0 देव प्रकाश शर्मा, पूर्व निदेशक, भारत कला भवन,काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी द्वारा ’’राष्ट्रवाद एवं संग्रहालय’’ विषयक अत्यन्त रोचक जानकारी प्रतिभागियों को उपलब्ध करायी गयी। संग्रहालयों में किस प्रकार नवीन तकनीकों का उपयोग हो रहा है, पर भी डाॅ0 शर्मा द्वारा प्रकाश डाला गया। अपने व्याख्यान में उन्होंने भारतकला भवन, मथुरा संग्रहालय, राज्य संग्रहालय, लखनऊ, पटना संग्रहालय, राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली, आदि से सभी को परिचित कराया।
द्वितीय मुख्य वक्ता के रूप में प्रो0 अमिता कन्नौजिया, विभागाध्यक्ष, जीवविज्ञान विभाग द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय के डाॅ0 एस0सी0 बाग संग्रहालय के संग्रह पर सचित्र जानकारी प्रतिभागियों से साझा की गयी। उन्होंने अपने व्याख्यान में कई ऐसी प्रजातियों पर प्रकाश डाला जो आज विलुप्त हो चुकी हैं।
मुख्य वक्ता के रूप में अशोक कुमार उपाध्याय, वरिष्ठ विरासत संरक्षक, लखनऊ द्वारा कागज एवं ताड़पत्र के इतिहास को प्रस्तुत किया गया। उन्होंने अवगत कराया कि भारत में कागज का प्रचलन लगभग 9वी-10वीं शताब्दी ई0 के आस-पास व्यवहार में आया। उपाध्याय द्वारा हस्त निर्मित कागज बनाने की विधि का प्रदर्शन भी किया गया। प्रतिभागियों द्वारा कागज बनाने के विभिन्न चरणों को भौतिक रूप से सीखने में विशेष रूचि ली गई।
चतुर्थ मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ0 संघर्ष राव, वैज्ञानिक एस0 डी0, रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन्स सेन्टर, विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी विभाग, उ0प्र0 द्वारा रिमोट सेन्सिंग की व्यवहारिक गतिविधियों, ऐतिहासिक स्थलों का जी0आई0एस0 पर मानचित्रण, 3डी0 स्कैनिंग, पुरातात्विक स्थलों की ड्रोन इमेंजिंग आदि से प्रतिभागियों को परिचित कराया गया।
डाॅ0 यशवंत सिंह राठौर, उप निदेशक, राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए अवगत कराया गया कि संग्रहालय में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड एवं बिहार राज्यों के लगभग 150 प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के प्रमुख रूप से 12 जनपदों संत कबीरनगर, गोरखपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, बस्ती, अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, जौनपुर, एवं वाराणसी के विद्यार्थियों/शोधार्थियों/जिज्ञासुओं द्वारा संगोष्ठी में प्रतिभाग किया गया है।
डाॅ0 राठौर द्वारा अवगत कराया गया कि इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सह कार्यशाला की सम्पूर्ति कल दिनांक 20 मार्च, 2026 को यशोधरा सभागार में अपरान्ह् 02ः00 बजे प्रमाण-पत्र वितरण के साथ सम्पन्न होगी। सम्पूर्ति सत्र के मुख्य अतिथि डा0 मंगलेश कुमार श्रीवास्तव, माननीय महापौर नगर निगम, गोरखपुर होंगे।
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