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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 21 Feb 2026 8:33 PM |   172 views

भोजपुरी हमारी लोक-आत्मा की धड़कन है, इसे पीढ़ियों तक जीवित रखना होगा– प्रो. राम नारायण तिवारी

गोरखपुर-विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BHAI) के तत्वावधान में “मातृ भाषा भोजपुरी: अस्मिता, अस्तित्व आ भविष्य” विषय पर एक गरिमामय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, साहित्यकारों और भाषा-प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
 
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ रूप कुमार बनर्जी, ध्रुव श्रीवास्तव , डॉ सुरेश सहित , डॉ सत्या पांडेय एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया ,तत्पश्चात भोजपुरी का शिव मंगल गीत गाई के गोबरे महादेव अंगना लिपायी…. अनीता सिंह , अमिता श्रीवास्तव , ममता त्रिपाठी, एकता शुक्ला , सीमा राय द्वारा भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया । 
 
मुख्य वक्ता प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज जब विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के युग में प्रवेश कर चुका है, तब आवश्यक है कि एआई को क्षेत्रीय एवं मातृभाषाओं के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि तकनीक भारतीय भाषाओं के साथ नहीं जुड़ेगी, तो भाषाई असमानता और बढ़ेगी। नई शिक्षा नीति (National Education Policy) में प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षण पर विशेष बल दिया गया है, जो भारतीय ज्ञान-परंपरा के अनुकूल है। उन्होंने “भारतीय भाषा परिवार” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय भाषाएँ भिन्न दिखाई अवश्य देती हैं, किंतु उनके ध्वन्यात्मक, रूपात्मक और वाक्य-संरचनात्मक स्तर पर गहरी समानता है, जो हमारी सांस्कृतिक एकात्मता का प्रमाण है।
 
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. राम नारायण तिवारी ने कहा कि भोजपुरी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि लोक-संस्कृति, लोकगीत, लोककथाओं और सामाजिक जीवन का आधार है। उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भाषा का संरक्षण केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि बौद्धिक और शैक्षिक स्तर पर भी होना चाहिए।
 
प्रमुख वक्ता डॉ. दीपक प्रकाश त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि मातृभाषा में शिक्षा से ही विद्यार्थी का बौद्धिक विकास स्वाभाविक रूप से होता है। उन्होंने कहा कि जब बच्चा अपनी भाषा में सोचता और सीखता है, तभी उसमें आत्मविश्वास और सृजनात्मकता विकसित होती है। उन्होंने भोजपुरी को शिक्षा, शोध और साहित्य के क्षेत्र में और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता बताई।
 
इस अवसर पर भोजपुरी के वरिष्ठ रचनाकार आचार्य मुकेश को मातृ भाषा गौरव सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया । 
 
इसी क्रम में साहित्यकार रविन्द्र मोहन तिवारी की पुस्तक “पंडित जी “ का लोकार्पण किया गया । 
कार्यक्रम में उपस्थितजन का स्वागत भाई के क्षेत्रिय निदेशक डॉ रूप कुमार बनर्जी ने किया । 
 
कार्यक्रम में भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने स्वागत उद्बोधन देते हुए संस्था की गतिविधियों और उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्था का लक्ष्य भोजपुरी भाषा को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाना है। उन्होंने बताया कि संस्था साहित्यिक गोष्ठियों, शोध-परियोजनाओं, युवा मंचों और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से भोजपुरी के संरक्षण एवं संवर्धन का निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए इसे भाषा-जागरण का महत्वपूर्ण कदम बताया।
 
कार्यक्रम का सफल संचालन शिवेन्द्र पांडेय ने किया, जिन्होंने पूरी संगोष्ठी को सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संचालित किया।
 
संगोष्ठी में वक्ताओं ने विश्व मातृभाषा दिवस की प्रासंगिकता, नई शिक्षा नीति में मातृभाषा के महत्व, तकनीक और भारतीय भाषाओं के समन्वय तथा भोजपुरी के सांस्कृतिक भविष्य पर गहन विचार-विमर्श किया। उपस्थित जनों ने कार्यक्रम को अत्यंत प्रेरणादायी एवं विचारोत्तेजक बताया।
 
इस अवसर पर त्रिभुवन मणि तिवारी, कवि राजेश राज, दिनेश तिवारी, सुभास दुबे , संजय पति त्रिपाठी, दिनेश गोरखपुरी, अशोक महर्षि, खुश्बू, विशाखा, पवन पंछी , कोमल मौर्य, कल्पना श्रीवास्तव, वीरसेन सूफी , प्रदीप सिंह , प्रमोद चोखानी , सत्य नारायण पथिक सहित तमाम साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे
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