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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 27 Sep 2024 11:21 AM |   631 views

साक्षात्कार

आज विश्व पर्यटन दिवस है | आज  निष्पक्ष प्रतिनिधि संपादक राकेश मौर्य द्वारा उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा संचालित काशीराम पर्यटन प्रबंध संस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अजय कुशवाहा  का साक्षात्कार किया गया । प्रस्तुत है साक्षात्कार के प्रमुख अंश 
 
संपादक – आप बुंदेलखंड की कला और संस्कृति को किस रूप में देखते हैं आपकी पुस्तक बुंदेलखंड किलों की भूमि कितनी कारगर है पाठको को यह बताने में कि इसकी सांस्कृतिक विरासत अदभुत है ?
 
डा अजय – बुंदेलखंड की संस्कृति अदभुत एवम अतुलनीय हैं । पथरीली नदियों, विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं से अच्छादित इस परिक्षेत्र में कला एवम संस्कृति को अत्यंत समृद्धि की दृष्टि से देखा जाता है । बुंदेलखंड को कलम, कला एवम कृपाण की धरा कहा जाता है । पारंपरिक लोक नृत्य ( राई, सैरा, मोनिया ) आदि लोक गीत ( आल्हा, राछारे) विभिन्न संस्कार गीत लोकवाद्य ,रीतिरिवाज ,संस्कार आदि से समृद्ध इस धरा की लोक संस्कृति पर्यटकों को अनायास ही आकर्षित करती है । हजारों वर्षो की परंपरा में यहां की लोक संस्कृति तीज त्योहार , लोकाचार यहां के आम जन मानस में इतने रचे बसे हैं कि किसी भी बुंदेली व्यक्ति से मिलने पर ही पूरी क्षेत्र की संपूर्ण संस्कृति की संपन्नता का आभास होता है ।
 
शौर्य की धरा बुंदेलखंड अपने समृद्ध , सांस्कृतिक ,विरासत के साथ साथ वीरता , त्याग देश भक्ति की भी शौर्य गाथा का वर्णन करती है। संपूर्ण बुंदेलखंड परिक्षेत्र में 150 से ज्यादा छोटे बड़े किले स्थित है।
 
चंदेल वंश , खंगार एवम बुंदेला वंश आदि द्वारा निर्मित ये किले स्थापत्य के अद्भुत उदाहरण है एवम इनके विस्मयकारी संरचना इनसे जुड़ी हुई है | अनेक ऐतिहासिक गाथाएं इनके अतीत के गौरव का स्मरण कराती है । मैने अपनी पुस्तक ( बुंदेलखंड किले की भूमि ) में कोशिश की है कि इतिहास के गवाह यह किले , इनसे जुड़ा इतिहास के बारे में सबको जानकारी हो सके एव खंडहर होते जा रहे हैं इन किलो का संरक्षण कर इन्हें पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाया जाए । 
 
संपादक – आपने कितनी पुस्तके लिखी है और कौन -कौन सी है ? इसके बारे में विस्तार से बताएं? 
 
डा अजय –  मेरी पहली पुस्तक बुंदेलखंड किलों की भूमि है, इसका प्रकाशन वर्ष 2020 और दूसरी पुस्तक बुंदेलखंड की अष्ठ गढ़िया ,प्रकाशन वर्ष 2024 है । आगामी पुस्तक है – बुंदेल खंड की लोक परंपराएं एव संस्कृति |
 
मुझे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान वर्ष 2021 में बुंदेलखंड किलों की भूमि के लिए सम्मानित किया गया है । 
 
संपादक- भारत में पर्यटन का विकास क्यों जरूरी है ? 
 
डा अजय – पर्यटन ही मात्र एक ऐसा क्षेत्र है जिसमे बिना कुछ निर्यात किए हुए सर्वाधिक विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है । प्रत्यक्ष एवम अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार का सृजन होता है । पर्यटन के विकास द्वारा स्थानीय संस्कृति ,लोक कला एव ऐतिहासिक ईमारतों का संरक्षण , संवर्धन के साथ- साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिलती है । स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार में वृद्धि एवं सामान्य जन सुविधाओं का भी विकास होता है । 
 
संपादक- पर्यटन द्वारा युवाओं को रोजगार के कौन -कौन से अवसर प्राप्त हो सकते हैं ? 
 
डा अजय – पर्यटन द्वारा अनेक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्राप्त होंते हैं । भारत सरकार / प्रदेश सरकार के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों द्वारा पर्यटन विषय में डिग्री/ डिप्लोमा के कोर्स उपलब्ध हैं । पर्यटन के क्षेत्र में गाइड , ट्रैवल एजेंट, टूर ऑपरेटर के साथ साथ सोशल मीडिया में पर्यटन पर आधारित ब्लॉग , रील्स, फोटोग्राफी से भी स्वरोजगार प्राप्त कर सकते हैं । 
 
पर्यटन द्वारा रोजगार प्राप्त करने के साथ ही आज के युवा अपने आस- पास के पर्यटन स्थलों ,संस्कृति एवम लोक कलाओं को सहेजने का कार्य भी कर सकते हैं ।
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