साक्षात्कार
भारत में मखाने का 90% उत्पादन बिहार के तालाबों और नम भूमि क्षेत्र में होता है बिहार का दरभंगा ,मधुबनी और पूर्णिया मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र है ।इसके अलावा पश्चिम बंगाल ,मणिपुर ,असम, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश में भी होता है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में तालाबों में इस खेती को एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। मखाना की खेती का पूर्वांचल में क्या भविष्य है? खासतौर पर कुशीनगर जनपद में इस विषय पर कुशीनगर के जिला उद्यान अधिकारी कृष्ण कुमार का साक्षात्कार किया निष्पक्ष प्रतिनिधि के संपादक राकेश मौर्य ने । प्रस्तुत है साक्षात्कार के प्रमुख अंश ——
संपादक –पूर्वांचल में मखाना की खेती को एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। मैं देख रहा हूं कि कुशीनगर के किसान मखाना की खेती के लिए काफी उत्साहित है मखाने की खेती का कुशीनगर में क्या भविष्य है?
कृष्ण कुमार –कुशीनगर की भूमि में काफी पानी लगा रहता है इसलिए मखाना की खेती की पर्याप्त संभावनाएं हैं यहां पर पूर्वांचल का यह जनपद बिहार की सीमा से लगा हुआ है यहां के जो सनी समाज के लोग हैं पहले से भी मखाने की खेती करते आ रहे हैं लेकिन इन लोगों का खेती करने का तरीका देसी ही है इसलिए उन लोगों को ज्यादा लाभ नहीं मिल पा रहा है इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मखाना विकास योजना लागू की गई है इससे किसानों को खेती करने के तरीके को अपग्रेड कर उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जाएगा।
संपादक -6 अगस्त 2026 को आप 40 किसानों के साथ आप दरभंगा स्थित मखाना अनुसंधान केंद्र गए थे वहां किसानों ने क्या सीखा ?
कृष्ण कुमार -देश का इकलौता मखाना अनुसंधान केंद्र हैदरभंगा । वहां किसानों ने यह देखा कि पहले मखाने की खेती सिर्फ तालाबों में ही हो सकती थी जब हम लोग वहां अनुसंधान केंद्र गए तो वहां पता चला कि नम क्षेत्र में भी हम मखाना की खेती कर सकते हैं। मखाना की खेती के फसल की कटाई में काफी समस्याएं होती हैं क्योंकि इसके जड़ ,तना, पत्ता और फल में काटे होते हैं अनुसंधान केंद्र ने एक नई मशीनरी बनाया है , नाव में ही फिट है जिसे कटाई आसान है और प्रोसेसिंग के लिए भी मशीनरी तैयार की गई है।
संपादक-मखाना की खेती कैसे करे किसान भाई इस विषय पर विस्तृत जानकारी दें ?
कृष्ण कुमार –मखाना की खेती दो जगह होती है तालाब में और खेत में जिनके पास पहले से तालाब है उसमें मखाना के साथ-साथ सिंघाड़ा की खेती कमल की खेती या उसमे मछली पालन भी कर सकते हैं धान की खेती के साथ मखाना की खेती भी होती है बुवाई का समय नवंबर में नर्सरी के लिए बीच गिराया जाता है तत्पश्चात जनवरी से फरवरी में ट्रांसप्लांट करते हैं।
संपादक –क्या मखाना की खेती के लिए सरकार कोई अनुदान भी दे रही है जिससे इस खेती को करने के लिए किसान उत्साहित हो?
कृष्ण कुमार –जी हां,मखाना की खेती के विकास के लिए मखाना विकास योजना ही शुरू कर दी गई है मखाना का 80 से 90% उत्पादन बिहार करता है हमारे तराई क्षेत्र में जो जनपद है जैसे कुशीनगर बहराइच सिद्धार्थ नगर बलरामपुर महाराजगंज इसमें भी मखाना की खेती की बहुत संभावनाएं थीं यदि तालाब की खेती करते हैं तो 716 00 प्रति हेक्टेयर और खेत में करते हैं तो 52800 प्रति हेक्टेयर तक सरकार द्वारा सब्सिडी दी जा रही है। इसमें ऐसा भी है कि यदि किसान के पास तालाब नहीं है तो तालाब बनाने के लिए भी सरकार अनुदान दे रही है । मखाना प्रोसेसिंग के लिए जो मशीन लगेगी उसमें चार प्रकार की मशीन हैं- माइक्रो स्मॉल बड़ी मीडियम इसमें भी 35% सब्सिडी दी जा रही है।
संपादक-क्या मखाना की खेती पारंपरिक खेती ( धान / गेहूं ) से ज्यादा लाभकारी है ?
कृष्ण कुमार –जी हां, धान की खेती की बजाय किसान भाई यदि मखाना की खेती करते हैं तो यह उन्हें आर्थिक रूप से काफी संपन्नता प्रदान करेगी।
संपादक-बतौर जिला उद्यान अधिकारी आप किसानों को क्या संदेश देना चाहेंगे ?
कृष्ण कुमार –कुशीनगर के किसान ज्यादा से ज्यादा मखाना की खेती करें । जहां मखाना की खेती क्षेत्र में बिहार का दबदबा है वहां इस क्षेत्र के किसान भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराए ।
संपादक -धन्यवाद|
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