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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 6 Feb 2026 7:10 PM |   239 views

प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की मांग : सुभाष मौर्य

भाटपाररानी – कृषि विज्ञान केंद्र (भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी) मल्हना, देवरिया के सभागार में कृषि विभाग, देवरिया के माध्यम से कृषि सखियों के लिए नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत 2 से 6 फरवरी 2026 तक पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के समापन समारोह में उपस्थित कृषि सखियों को संबोधित करते हुए जिला कृषि उपनिदेशक सुभाष मौर्य ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से से किसानों कि रासायनिक उर्वरकों पर से निर्भरता खत्म हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह मिशन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा तथा मिट्टी की उर्वरता बहाल कर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. मांधाता सिंह ने कृषि सखियों से आह्वान किया कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को अपने गांवों में फैलाएं और अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने आगे बताया कि कृषि सखियां अब गांव स्तर पर प्राकृतिक खेती के प्रचार-प्रसार का माध्यम बनेंगी, जिससे देवरिया जिले में जैविक खेती में वृद्धि होगी।

केंद्र के सस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. कमलेश मीना ने बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र एवं ब्रह्मास्त्र की व्यावहारिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इनका नियमित प्रयोग फसल गुणवत्ता बेहतर कर सकता है।

गृह विज्ञान विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षण समन्वयक श्री जय कुमार ने कहा कि गृह वाटिका में प्राकृत खेती को अपनाकर परिवारों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे परिवार की पोषण सुरक्षा बेहतर होगी।

पशु जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. अंकुर शर्मा ने जोर दिया कि गौधन प्राकृतिक खेती का आधार है और पशुधन एकीकरण से खेती पूरी होती है।

इस समापन कार्यक्रम में कंचन लता, संगीता देवी, वंदना देवी, विजय लक्ष्मी सहित 60 कृषि सखियों ने भाग लिया एवं सभी को परीक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।

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