Friday 7th of August 2026 08:17:24 AM

Breaking News
  • उत्तर प्रदेश रोडवेज की बसों में 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को मिलेगी निःशुल्क यात्रा सुविधा |
  • उत्तर प्रदेश के 13 आईएस का स्थानान्तरण|
  • असम में बाढ़ राहत तेज |
  • गाजियाबाद में 12 अगस्त तक स्कूल बंद |
Facebook Comments
By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 6 Feb 2026 7:31 PM |   238 views

संग्रहालय बना बच्चों के लिए ‘लर्निंग लैब’, 700 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा और भारतीय संस्कृति को समझा

लखनऊ:भविष्य की अल्फा जनरेशन (2010 से 2024 के बीच जन्मे ) को भारतीय कला, संस्कृति और विरासत से प्रारंभिक स्तर पर जोड़ने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा एक सार्थक पहल की गई। सरकार द्वारा बच्चों की सोच, समझ और संस्कार निर्माण पर अभी से ध्यान केंद्रित करते हुए राज्य संग्रहालय, लखनऊ में निजी विद्यालयों की कक्षा 1 तक की लगभग 700 छात्राओं एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए विशेष संग्रहालय भ्रमण का आयोजन किया गया।
 
इस शैक्षिक कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्हें प्राचीन भारतीय संस्कृति और कला से परिचित कराना रहा। भ्रमण के दौरान बच्चों के लिए बाल गतिविधि आधारित एक्टिविटी कार्ड के माध्यम से रोचक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिससे उन्होंने खेल-खेल में ज्ञान अर्जित किया। कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों को सूक्ष्म जलपान, पेंसिल, स्केच पेन एवं सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
 
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने राज्य संग्रहालय के इस प्रयास की सराहना करते हुए बताया कि, इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों में सांस्कृतिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ-साथ उन्हें समाज और पर्यावरण के प्रति भी जागरूक बनाती हैं। उन्होंने कहा कि अल्फा जनरेशन को भारतीय कला और संस्कृति से जोड़ना सरकार की दीर्घकालिक सोच का हिस्सा है, जिससे आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रह सके।
 
मंत्री जयवीर सिंह ने, आगे कहा कि आज की अल्फा जनरेशन डिजिटल युग में तेजी से आगे बढ़ रही है, ऐसे में उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। संग्रहालयों के माध्यम से बच्चों को भारत की समृद्ध कला, इतिहास और परंपराओं से परिचित कराकर उनमें गर्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा सकती है।
 
मंत्री ने कहा कि प्रारंभिक उम्र में मिला संस्कार ही भविष्य के जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करता है और इसी सोच के तहत सरकार शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक जागरूकता को भी समान महत्व दे रही है।
 
उल्लेखनीय है कि राज्य संग्रहालय, लखनऊ प्रदेश का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित बहुउद्देशीय संग्रहालय है, जहां पुरातत्व, प्राकृतिक इतिहास, सजावटी कला, चित्रकला और मुद्राशास्त्र से संबंधित बहुमूल्य कलाकृतियों का समृद्ध संग्रह सुरक्षित है।
 
उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय की निदेशक डॉ. सृष्टि धवन ने कहा कि बच्चों को प्रारंभिक आयु में ही भारतीय कला, संस्कृति और विरासत से जोड़ना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अल्फा जनरेशन तकनीक के साथ तो सहज है, लेकिन उसे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। राज्य संग्रहालय में आयोजित ऐसे शैक्षिक भ्रमण और गतिविधि आधारित कार्यक्रम बच्चों की जिज्ञासा, रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
 
डॉ. धवन ने कहा कि संग्रहालय केवल पुरानी वस्तुओं को देखने का स्थान नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सीखने, समझने और सोचने का जीवंत मंच है। आने वाले समय में भी राज्य संग्रहालय द्वारा विद्यालयी छात्रों के लिए इस प्रकार के नवाचारी और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझते हुए भविष्य की ओर आगे बढ़ सके।
 
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय की निदेशक डॉ. सृष्टि धवन, सहायक निदेशक डॉ. मीनाक्षी खेमका, विनय कुमार सिंह, निदेशक, राज्य संग्रहालय सहित संग्रहालय के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
 
उन्होंने बच्चों को भारतीय इतिहास, कला और सांस्कृतिक धरोहरों के महत्व की जानकारी दी और संग्रहालय को ज्ञान का जीवंत केंद्र बताया।
Facebook Comments