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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 26 Dec 2025 8:57 PM |   81 views

कुक्कुट विकास नीति से बदली कानपुर की तस्वीर

कानपुर नगर-योगी सरकार की कुक्कुट विकास नीति से कानपुर नगर में पशुपालन और रोजगार की दिशा में बड़ा बदलाव आया है। जिले में इस योजना के तहत स्थापित पोल्ट्री इकाइयों से अंडा उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है और बड़ी संख्या में किसानों व युवाओं को स्वरोजगार का अवसर मिला है।
 
पोल्ट्री सेक्टर में तेज़ी से विस्तार-
पशुपालन विभाग द्वारा लागू कुक्कुट विकास नीति–2013 और 2022 के अंतर्गत जिले में अलग-अलग क्षमता की पोल्ट्री इकाइयों को स्वीकृति दी गई। 
 
नवंबर 2025 तक संचालित इकाइयां –
 30 हजार क्षमता वाली 18 लेयर इकाइयां
 10 हजार क्षमता वाली 4 लेयर इकाइयां
 60 हजार क्षमता वाली 5 लेयर इकाइयां
 
अंडा उत्पादन में बड़ी उपलब्धि-
 • 30 हजार क्षमता वाली इकाइयों से अब तक करीब 5.32 करोड़ अंडों का उत्पादन हुआ है।
 • 10 हजार क्षमता वाली इकाइयों से लगभग 68 लाख अंडे उत्पादित हुए हैं।
 • 60 हजार क्षमता वाली इकाइयों से 1.06 करोड़ से अधिक अंडों का उत्पादन दर्ज किया गया है।
 
पोल्ट्री से बदली जिंदगी-
कानपुर नगर के चौबेपुर क्षेत्र के किसान अनुपम सचान ने कुक्कुट विकास नीति के तहत 30 हजार क्षमता का लेयर फार्म स्थापित किया। पहले सीमित आमदनी पर निर्भर रहे अनुपम अब पोल्ट्री फार्म से नियमित आय अर्जित कर रहे हैं। उनके फार्म से हर महीने हजारों अंडों का उत्पादन हो रहा है और स्थानीय स्तर पर कई लोगों को रोजगार भी मिला है। अनुपम का कहना है कि सरकारी योजना और विभागीय मार्गदर्शन से उनका व्यवसाय लगातार आगे बढ़ रहा है।
 
कुक्कुट विकास नीति की मुख्य बातें-
 • पोल्ट्री व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए लेयर और ब्रॉयलर फार्म की स्थापना
 • 30 हजार पक्षियों की क्षमता वाले लेयर फार्म की अनुमति
 • 10 हजार पक्षियों की क्षमता वाले ब्रॉयलर फार्म की स्थापना
 • परियोजना लागत के लिए बैंक ऋण की सुविधा
 • बैंक ऋण पर ब्याज में छूट (इंटरेस्ट सब्सिडी)
 • फार्म के लिए भूमि खरीद पर स्टांप ड्यूटी में रियायत
 • बिजली शुल्क में राहत, जिससे लागत कम होती है
 
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि शासन का लक्ष्य हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। कुक्कुट विकास नीति के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। योजनाओं की नियमित निगरानी से लाभार्थियों को समय पर लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है।
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