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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 15 Dec 2025 7:24 PM |   165 views

डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया बिल, 2025 पेश किया

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज संसद में सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया बिल, 2025  पेश किया, जो भारत के परमाणु ऊर्जा को नियंत्रित करने वाले कानूनी तंत्र को अपडेट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक जिम्मेदारी अधिनियम, 2010 को रद्द करना और उन्हें भारत की वर्तमान एवं भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुरूप एक एकल, व्यापक कानून में परिवर्तित करना है।

विधेयक के साथ संलग्न उद्देश्यों एवं कारणों के विवरण के अनुसार, निरंतर अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से भारत को परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को जिम्मेदारी के साथ संचालित करने में सक्षम बनाया है। इस अनुभव के आधार पर, सरकार स्वच्छ ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने एवं डेटा केंद्रों और भविष्य के लिए तैयार अनुप्रयोगों जैसी उभरती आवश्यकताओं के लिए चौबीसों घंटे विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति प्रदान करने के लिए परमाणु ऊर्जा की स्थापित क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करने की संभावना देखती है।

प्रस्तावित विधेयक भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा एवं जलवायु लक्ष्यों से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। यह 2070 तक कार्बन न्यूनीकरण के लिए देश की रूपरेखा और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के लक्ष्य को रेखांकित करता है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, विधेयक स्वदेशी परमाणु संसाधनों का पूर्ण उपयोग करने और सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देता है, साथ ही भारत को वैश्विक परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करता है।

यह विधेयक परिचालन स्तर पर परमाणु ऊर्जा के उत्पादन या उपयोग में शामिल निर्दिष्ट व्यक्तियों के लिए लाइसेंस और सुरक्षा प्राधिकरण का प्रावधान करता है, साथ ही निलंबन या रद्द करने का स्पष्ट आधार भी बताता है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा, खाद्य एवं कृषि, उद्योग एवं अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में परमाणु और विकिरण प्रौद्योगिकियों के उपयोग को विनियमित करना है जबकि अनुसंधान, विकास एवं नवाचार गतिविधियों को लाइसेंसिंग आवश्यकताओं से छूट प्रदान की गई है।

इस बिल में परमाणु क्षति के लिए एक संशोधित एवं व्यावहारिक नागरिक दायित्व तंत्र का भी प्रस्ताव है, यह परमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड को वैधानिक स्थिति प्रदान करता है, और सुरक्षा, सुरक्षा उपाय, गुणवत्ता आश्वासन एवं आपातकालीन तैयारी से संबंधित तंत्र को मजबूत करता है। यह नए संस्थागत व्यवस्थाओं के निर्माण का प्रावधान करता है, जिसमें एक परमाणु ऊर्जा शिकायत सलाहकार परिषद का गठन, दावा अधिकारियों की नियुक्ति और गंभीर परमाणु क्षति से संबंधित मामलों के लिए एक परमाणु क्षति दावा आयोग शामिल हैं, जिसमें विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण अपीलीय प्राधिकरण के रूप में काम करेगा।

इस विधेयक पेश करके, सरकार ने संकेत दिया है कि वह भारत के ऊर्जा परिवर्तन, तकनीकी प्रगति एवं अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप नाभिकीय शासन को आधुनिक बनाने का सोच रखती है। प्रस्तावित कानून नाभिकीय ऊर्जा के विस्तार को सुरक्षा, जवाबदेही एवं सार्वजनिक हित के साथ संतुलित करने का प्रयास है, और नाभिकीय ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा और कम कार्बन उत्सर्जन वाले भविष्य की दिशा में राष्ट्रीय प्रयास को व्यापक बनाता है।

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