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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 12 Dec 2025 5:58 PM |   348 views

दिसम्बर माह के प्रमुख कृषि कार्य

भाटपाररानी -दिसंबर माह रबी फसलों (गेहूं,जौ, मटर,चना, सरसों, तीसी, ) की देखभाल, , बागवानी (आम, लीची, अमरूद, आँवला) की प्रबंधन, और सब्जियों (आलू, फूलगोभी, पत्तागोभी, ब्रोकली, मूली, पालक, धनिया, मटर, बैंगन, गाजर) की देखभाल  के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें सिंचाई, खाद, / उर्वरक ,कीट-रोग नियंत्रण और पशुपालन पर विशेष ध्यान देना होता है।  

प्रो. रवि प्रकाश मौर्य निदेशक प्रसार्ड ट्रस्ट मल्हनी देवरिया के अनुसार माह दिसंबर रबी फसलों का मध्य होता है।इस समय कड़ाके की ठ़ड पड़ती है, जो फसलों के लिए हानिकारक है। अतः किसानों को इस माह में अपने सेहत के साथ- साथ फसलों एवं पशुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। 

गेहूँ- नवम्बर माह में बोए गये गेहूँ की पहली सिंचाई क्रान्तिक अवस्था में बुआई के 21-23 दिन के बाद करें।सिंचाई के 3-4 दिन बाद यूरिया का प्रयोग करें। बिलम्ब से बोई जाने वाली गेहूँ की प्रजाति डी.बी.डब्ल्यू-14,मालवीय-234,,पी.बी.डब्ल्यू-524 या जो पछैती प्रजाति उपलब्ध हो की बुआई 15 दिसंबर तक आवश्यक रूप से कर लें उसके बाद बोने से उत्पादन में कमी होती है।
 
तिलहनी फसलें- सरसों में बुवाई के 40-45 दिन बाद आवश्यकतानुसार .सिंचाई करें। माँहू कीट की निगरानी रखें, पीला स्टिकी ट्रेप 10-15 प्रति एकड़ में 30-30 मीटर की दूरी पर लगायें।
 
दलहनी फसलें- चना, मटर, मसूर की फसलों में खरपतवार का उन्मूलन करें। बर्षा न होने पर आवश्यकतनुसार हल्की सिंचाई करें।
 
सब्जियां-  फूलगोभी, पत्तागोभी, ब्रोकली, मूली, पालक, मेथी, सोवा ,गाजर, हरी मटर, धनिया, बैंगन, टमाटर आदि फसलों की सिचाई का ध्यान रखें। तैयार सब्जियों को समय से बिक्री करें। प्याज की रोपाई करें।
 
छोटे फलदार पौधों की देखभाल करें। आलू में झुलसा वीमारी लगने की संभावना रहती है। समय से रोकथाम करें।
 
पालें से फसलों का बचाव- इस माह तापमान काफी कम हो जाता है। पालें पड़ने की संभावना हो तो खेत के चारों तरफ़ धुआं कर दें। गेहूँ में हल्की सिचाई कर दें।
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