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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 4 Dec 2025 8:28 PM |   144 views

प्रदेश में आलू अनुसंधान एवं क्षमता-विकास को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

लखनऊ -अपर मुख्य सचिव, उद्यान विभाग बी.एल. मीणा ने बताया कि प्रदेश में आलू फसल के उन्नत अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड ने आगरा स्थित सिग्ना फार्म की भूमि का कब्ज़ा लेकर निर्माण व अनुसंधान संबंधी गतिविधियों को तेज कर दिया है।
 
उन्होंने जानकारी दी कि मिट्टी की जांच के उपरांत अंतर्राष्ट्रीय आलू अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड के साथ हुए समझौते के तहत खेत स्तर पर आलू उत्पादन से संबंधित गतिविधियाँ प्रारंभ कर दी हैं और वर्तमान में फील्ड ट्रायल सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा केन्द्रीय आलू एवं शकरकन्द अनुसंधान केन्द्र स्टियरिंग कमिटी, जिसके अध्यक्ष सीआईपी के महानिदेशक तथा उपाध्यक्ष भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव हैं, ने भारत सरकार, उत्तर प्रदेश, नेपाल और भूटान के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श करके केन्द्रीय आलू एवं शकरकन्द अनुसंधान केन्द्र की अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों हेतु दिशा-निर्देश तैयार कर लिए हैं।
 
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि भवन परिसर (लैब, कार्यालय व अन्य अवसंरचना) के निर्माण के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड एवं भारत सरकार ने नेशनल बिल्डिंग कान्ट्रक्शन कारपोरेशन को कार्यान्वयन एजेंसी नामित किया है। प्रदेश सरकार द्वारा केन्द्रीय आलू एवं शकरकन्द अनुसंधान केन्द्र के लिए आगरा में अस्थायी कार्यालय भी तैयार कर लिया गया है, जिसे शीघ्र ही राज्य सरकार द्वारा सौंप दिया जाएगा।
 
मुख्य केंद्र के निर्माण उपरांत किसानों के हॉस्टल एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास हेतु राज्य सरकार ने 24 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की है, जबकि लोक निर्माण विभाग ने केंद्र तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सड़कों के विकास का कार्य भी अपने दायित्व में ले लिया है।
 
अपर मुख्य सचिव मीणा ने बताया कि किसानों की क्षमता-वृद्धि हेतु सीआईपी ने उद्यान विभाग, उत्तर प्रदेश के सहयोग से दो प्रमुख प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए, पहला लखनऊ में 16 अक्टूबर, 2025 को और दूसरा सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस पोटैटो, हापुड़ में 28 अक्टूबर, 2025 को।
 
इन कार्यक्रमों में क्रमशः 50 और 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा किसानों को अच्छे कृषि अभ्यास (गैप), सतत खेती के तरीके और बाजार से जुड़े अवसरों के बारे में विस्तृत रूप से प्रशिक्षित किया गया।
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