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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 31 Oct 2025 8:27 PM |   427 views

सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी विहार की 94वीं वर्षगांठ पर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के होंगे दर्शन-जयवीर सिंह

लखनऊ: -सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी, विहार की 94वीं वर्षगांठ के पावन अवसर पर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के सार्वजनिक दर्शन हेतु विधिवत अनावरण किया जाएगा। आगामी 03 से 05 नवंबर 2025 तक भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेषों को बौद्ध श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा। सारनाथ वही पुण्य भूमि है, जहां भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश ’’धर्मचक्र प्रवर्तन’’ दिया था।
 
यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी अस्थि अवशेष दर्शन के लिए बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु आए थे। इस वर्ष पूर्व से भी बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षुओं और आस्थावानों के पहुंचने का अनुमान है। बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियां विभिन्न देशों जैसे- श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, नेपाल तथा कोलकाता, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश, लद्दाख और हिमालयी क्षेत्रों से सारनाथ पहुंच रहे हैं। यह आयोजन महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया, सारनाथ केंद्र और वियतनामी बौद्ध संघ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
 
भगवान बुद्ध के अवशेषों को साल में दो बार बुद्ध पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर सार्वजनिक दर्शन हेतु रखा जाता है। इस दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेषों के दर्शन करते हैं। भगवान बुद्ध के अवशेषों और उससे जुड़े आस्था की यात्रा भी उतनी ही प्राचीन है।
 
लगभग 2,600 वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के उपरांत उनके अवशेषों को श्रद्धापूर्वक आठ भागों में विभाजित कर सम्पूर्ण भारत में बने स्तूपों में रखा गया। कालांतर में सम्राट अशोक ने इन पवित्र अवशेषों को पुनः खोजकर अपने विशाल साम्राज्य के विविध स्थलों पर पुनर्स्थापित कराया। मूलगंध कुटी बिहार में बुद्ध के दो अस्थि अवशेष सुरक्षित हैं।
 
इनमें से एक अवशेष गांधार (तक्षशिला) क्षेत्र के एक प्राचीन स्तूप से प्राप्त हुआ था, जिसे भारत सरकार ने 1956 में भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के 2,500वें वर्ष पर महाबोधि सोसायटी को भेंट किया था। दूसरा अवशेष, दक्षिण भारत के नागार्जुनकोंडा से प्राप्त हुआ था, जो एक पात्र में सुरक्षित रखा गया। इन दोनों अवशेषों के दर्शन वर्ष में दो बार होते हैं। दर्शन के बाद अवशेषों को विधिवत बुद्ध प्रतिमा के नीचे स्थापित किया जाता है।
 
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सारनाथ भारत के आध्यात्मिक मानचित्र पर विशिष्ट स्थान रखता है। यही वह पावन भूमि है जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश दिया था। आज भी यह स्थल विश्व भर से आने वाले श्रद्धालुओं और विद्वानों को आकर्षित करता है।
 
वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश के बौद्ध स्थलों पर लगभग 28 लाख पर्यटक आए थे, जबकि 2024 तक यह संख्या बढ़कर 84 लाख से अधिक हो गई, जो लगभग 200 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है। वर्ष 2025 की पहली छमाही में केवल सारनाथ में ही लगभग 5 लाख पर्यटकों का आगमन हुआ, जो इसे बौद्ध स्थलों में विशिष्टता प्रदान करता है।
 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार लगातार बौद्ध सर्किट के विकास, सुविधाओं के विस्तार और बेहतर संपर्क व्यवस्था पर कार्य कर रही है
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