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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 9 Sep 2025 7:10 PM |   310 views

सिंधिया ने ग्लोबल पोस्टल समिट में दो प्रमुख यूपीयू परिषदों के लिए भारत की दावेदारी की घोषणा की

केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज दुबई में 28वें यूनिवर्सल पोस्टल कांग्रेस में यूपीआई-यूपीयू एकीकरण परियोजना का अनावरण किया। यह दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए सीमा पार प्रेषण में बदलाव लाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल है।

डाक विभाग (डीओपी), एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) और यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) द्वारा विकसित यह पहल भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (यूपीआई) को यूपीयू इंटरकनेक्शन प्लेटफ़ॉर्म (आईपी) के साथ एकीकृत करती है। इससे डाक नेटवर्क की पहुंच यूपीआई की गति और सामर्थ्य के साथ जुड़ जाती है।

सिंधिया ने इसे “एक तकनीकी लॉन्च से कहीं बढ़कर, एक सामाजिक समझौता” बताया। उन्‍होंने कहा, “डाक नेटवर्क की विश्वसनीयता और यूपीआई की गति का मतलब है कि सीमा पार के परिवार तेज़ी से, सुरक्षित और बहुत कम लागत पर पैसा भेज सकते हैं। यह इस बात की पुष्टि करता है कि नागरिकों के लिए बनाए गए सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को सीमाओं के पार जोड़कर मानवता की बेहतर सेवा की जा सकती है।”

उन्होंने एक आधुनिक, समावेशी डाक क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। यह चार पहलुओं 1. निर्बाध डेटा-संचालित लॉजिस्टिक्स के माध्यम से जुड़ना; 2. प्रत्येक प्रवासी और डिजिटल उद्यम को सस्ती डिजिटल वित्तीय सेवाएं प्रदान करना; 3. एआई, डिजीपिन और मशीन लर्निंग के साथ आधुनिकीकरण करना; और 4. यूपीयू समर्थित तकनीकी सेल के साथ दक्षिण-दक्षिण साझेदारी के माध्यम से सहयोग करना पर आधारित है।

प्रधानमंत्री  नरेन्‍द्र मोदी के डिजिटल इंडिया विज़न और विकसित भारत की दिशा में काम कर रहा भारतीय डाक अपने व्यापक दायरे और समावेशन का एक सशक्त उदाहरण है। सिंधिया ने कहा, “आधार, जनधन और भारतीय डाक भुगतान बैंक के साथ, हमने 56 करोड़ से ज़्यादा खाते खोले हैं, जिनमें से ज़्यादातर महिलाओं के नाम पर हैं। भारतीय डाक ने पिछले साल 90 करोड़ से ज़्यादा पत्र और पार्सल पहुंचाए। यह समावेशन का वह व्यापक दायरा और भावना है जिसे हम वैश्विक मंच पर लाते हैं।

सिंधिया ने इस चक्र के दौरान ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान पर विशेष ध्यान देते हुए प्रौद्योगिकी को नवाचार में बदलने के लिए 10 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के आदर्श वाक्य को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने दोहराया कि भारत संसाधनों, विशेषज्ञता और मैत्री के साथ कैसे तैयार है।

सिंधिया ने यूपीयू की प्रशासन परिषद और डाक संचालन परिषद के लिए भारत की उम्मीदवारी की भी घोषणा की। इससे वैश्विक डाक समुदाय के लिए एक जुड़े हुए, समावेशी और टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई।

उन्होंने दुबई में 28वें यूनिवर्सल पोस्टल कांग्रेस में अपने भाषण का समापन करते हुए कहा, “भारत आपके पास प्रस्तावों के साथ नहीं, बल्कि साझेदारी के साथ आता है। हम लचीलेपन में विश्वास करते हैं, ऐसे अंतर-संचालनीय समाधानों को सक्षम करते हैं जो महंगे विखंडन से बचते हैं, और विश्वास में, भुगतान, पहचान, पते और रसद को जोड़ते हैं ताकि वैश्विक वाणिज्य निर्बाध हो।

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