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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 3 Jun 2025 7:32 PM |   490 views

विकसित कृषि संकल्प अभियान में किसानों को सिखाए खेती के गुर

देवरिया -कृषि विज्ञान केंद्र (भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी), मल्हना, देवरिया एवं कृषि विभाग देवरिया के तत्वाधान में कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत गठित विशेषज्ञों की टीम द्वारा आज  कार्यक्रम का छठवां दिन मनाया गया।

यह कार्यक्रम विकासखंड लार के 9 गांवों –कुंडोली, चनुकी, रावतपार राघेन, नेमा, बरडीहा परशुराम, ठाकुर गौरी, सजाव, डढवार में आयोजित किया गया। डॉ. मांधाता सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र देवरिया ने प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती को अपनाने किसानों को विस्तृत जानकारी दी गई।

उप कृषि निदेशक  सुभाष मौर्या ने किसानों को मोटे अनाजों की खेती अधिक से अधिक करने पर बल दिया।डॉ ने कहा कि मिट्टी का स्वास्थ्य बनाए रखने में जैविक और प्राकृतिक खेती विशेष भूमिका निभाती है।

डॉ. रजनीश श्रीवास्तव, वैज्ञानिक (उद्यान विज्ञान) ने सब्जी उत्पादन की नवीन तकनीकों जैसे उन्नतशील प्रजातियों का चयन, फसलों की मेड पर बुवाई, बिछावन विधि, एवं संकर प्रजातियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि सब्जियों का अच्छा उत्पादन लेने में प्रजातियों की अहम भूमिका होती है।

डॉ. कमलेश मीना, वैज्ञानिक सस्य विज्ञान ने गर्मी की गहरी जुताई, बीज शोधन, एवं खरीफ तिलहन की उन्नतशील तनिकियो पर जोर दिया।

जिला कृषि अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने कृषि से जुड़ी सभी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया।

जय कुमार, वैज्ञानिक (गृह विज्ञान) ने बताया कि घरेलू उद्योग जैसे अचार, मुरब्बा, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन आदि से ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

डॉ. अंकुर शर्मा, वैज्ञानिक (पशु जैव प्रौद्योगिकी) ने कहा कि छोटी जोत वाले किसानों के लिए पशुपालन आजीविका चलाने का अच्छा जरिया बन सकता हैं।

खंड विकास अधिकारी संतोष ने भी किसानों को अपनी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। इफ्फको से आए अभिषेक शुक्ला, फसल बीमा से जुड़े अधिकारियों ने भी किसानों को फसल बीमा की जरूरत पर विशेष बल दिया।

कार्यक्रम में किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त किया। 1250 से अधिक किसानों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। कृषि संकल्प अभियान के माध्यम से गांव-गांव जाकर किसानों को तकनीकी जानकारी देने का यह प्रयास निरंतर जारी है।

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