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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 22 May 2025 6:07 PM |   559 views

प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की जरूरत

भाटपाररानी -कृषि विज्ञान केंद्र (भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी) मल्हना, देवरिया के सभागार में कृषि विभाग, देवरिया के माध्यम से कृषि सखियों के लिए नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत प्राकृतिक खेती पर चल रहे पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ मांधाता सिंह ने बताया कि दिन प्रतिदिन खेती में रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से  खेत की मिट्टी,पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य खराब होता जा रहा है इसलिए आज के समय में प्राकृतिक खेती को अपनाना जरूरी है।
 
केंद्र के उद्यान विज्ञान विशेषज्ञ डॉ रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि गौ आधारित प्राकृतिक खेती में बीजामृत एक प्रमुख घटक है और इसका उपयोग बुवाई से पूर्व बीजों का शोधन करने के लिए किया जाता है उन्होंने बीजामृत बनाने के बारे में विस्तार पूर्वक बताया।
 
सस्य  विज्ञान विशेषज्ञ डॉ कमलेश मीना ने बताया कि जीवामृत प्राकृतिक खेती का एक ऐसा तरल खाद है जिसके उपयोग से पौधे का विकास, वृद्धि एवं खेत की मिट्टी में जैव क्रियाशीलता को बढ़ाने में सहायक होता है।
 
डॉ मीना ने जीवामृत बनाने के बारे में विस्तृत जानकारी दी। गृह विज्ञान विशेषज्ञ जयकुमार ने बताया कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर मानव स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
 
पशु जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ अंकुर शर्मा ने बताया कि पशुधन के बिना खेती करना अधूरी है और प्राकृतिक खेती में गौधन का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान है।
 
इस अवसर पर राजमती देवी, किरण देवी, सीमा देवी, शीला देवी, रीता देवी, कंचन देवी,अनीता देवी के साथ साथ ५४ कृषि सखियों के भाग लिया।
 
 
 
 
 
 
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