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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 7 Nov 2024 4:29 PM |   482 views

सूर्योपासना के लिए प्रसिद्ध पर्व है छठ- डॉ राजेश

गोरखपुर -सरस्वती शिशु मंदिर ( 10+2 ) पक्की बाग गोरखपुर में छठ महापर्व के शुभ अवसर पर विद्यालय परिवार को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि भारत त्योहारों का देश है| यहां पर प्रतिदिन कोई न कोई पर्व एवं त्योहार रहता है | सबका अपना एक पौराणिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक कारण है|उसी कड़ी में छठ महापर्व आस्था, पवित्रता, भक्ति और सूर्य उपासना का महापर्व है |
 
सूर्योपासना के लिए प्रसिद्ध पर्व  मूलत: सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है। यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है|
 
पारिवारिक सुख-समृद्धी तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है। स्त्री और पुरुष समान रूप से इस पर्व को मनाते हैं। छठ व्रत के सम्बन्ध में अनेक कथाएँ प्रचलित हैं | उनमें से एक कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गये, तब श्री कृष्ण द्वारा बताये जाने पर द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। तब उनकी मनोकामनाएँ पूरी हुईं तथा पांडवों को उनका राजपाट वापस मिला। लोक परम्परा के अनुसार सूर्यदेव और छठी मइया का सम्बन्ध भाई-बहन का है। लोक मातृका षष्ठी की पहली पूजा सूर्य ने ही की थी।
 
छठ पर्व को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो षष्ठी तिथि (छठ) को एक विशेष खगोलीय परिवर्तन होता है, इस समय सूर्य की पराबैगनी किरणें पृथ्वी की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती हैं lइस कारण इसके सम्भावित कुप्रभावों से मानव की यथासम्भव रक्षा करने का सामर्थ्य प्राप्त होता है। पर्व पालन से सूर्य (तारा) प्रकाश (पराबैगनी किरण) के हानिकारक प्रभाव से जीवों की रक्षा सम्भव है। पृथ्वी के जीवों को इससे बहुत लाभ मिलता है।
 
 विद्यालय की  आचार्या प्रतिष्ठा सिंह, अंशिका गौड़, प्रियदर्शनी द्वारा मनोहरी  गीत प्रस्तुत किया गया |
 
इस शुभ अवसर पर समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहा|
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