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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 24 Oct 2023 5:06 PM |   623 views

इस गांव का नाम ही है रावण… दशहरे पर लोग मनाते है शोक

विदिशा। पूरे देश में आज दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार मनाया जा रहा है। दशहरे के दिन जगह-जगह रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाने की लिए रावण के पुतले का दहन किया जाता है। वहीं एक ऐसा गांव भी है जिसका नाम ही रावण है। ये गांव मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में है। दशहरे के दिन यहां रावण की भव्य पूजा-आरती की जाती है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। आखिर इस गांव में लोगों की एक राक्षस के प्रति इतनी भक्ति क्यों है आइए जानते हैं।

रावण का वंशज मानते हैं लोग…

रावण गांव के लोग अपने आप को रावण बाबा का वंशज मानते हैं। गांव के लोगों की रावण के प्रति भक्ति देखकर लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं। यहां गांव के स्कूल, ग्राम पंचायत परभी रावण लिखा हुआ है।

क्यों रखा गांव का नाम रावण ….

रावण बाबा मंदिर के पुजारी पंडित नरेश तिवारी ने बताया कि उत्तर दिशा में तीन किलोमीटर दूरी पर एक पहाड़ी है। ऐसी मान्यता है कि इस पहाड़ी पर प्राचीन काल में बुद्ध नामक एक राक्षस रहा करता था जो रावण से युद्ध करने की इच्छा रखता था।

जब वह युद्ध करने लंका पहुंचता तो लंका की चकाचौंध देख मोहित हो जाता और उसका क्रोध भी शांत हो जाता था। एक दिन रावण को उसके बारे में पता चल गया। रावण ने उस राक्षस से पूछा और कहा- तुम बार-बार दरबार में आते हो और हर बार बिना कुछ बताए चले जाते हो। रावण के सवाल पर बुद्ध राक्षस ने बताया, महाराज (रावण) मैं हर बार आपसे युद्ध की इच्छा लेकर आता हूं, लेकिन यहां आपको देखकर मेरा क्रोध शांत हो जाता है। तब रावण ने कहा कि तुम कहीं मेरी एक प्रतिमा बना लेना और उसी से युद्ध करना। तब से यह प्रतिमा बनी हुई है।

गाड़ियों पर लिखवाते हैं रावण बाबा का नाम…

लोगों ने उस प्रतिमा की महिमा को देखते हुए वहां रावण बाबा का मंदिर बना दिया। लोगों की यहां रावण से इस कदर आस्था जुड़ी हुई है कि जब भी गांव में कोई नया वाहन खरीदता है तो उस पर रावण बाबा का नाम जरूर लिखवाता है।

रावण बाबा मंदिर में उनकी आरती गाई जाती है। रावण को जलाने की बात वो सुन भी नहीं सकते हैं। दशहरे के दिन गांवमें रावण दहन का शोक मनाया जाता है और रावण को मनाने के लिए विशेष पूजा की जाती है। रावण बाबा यहां के लोगों के देवता हैं और यहां प्रथम पूजा रावण बाबा की होती है।

रावण गांव में रहने वाले लोग अपने शरीर पर टैटू गुदवाकर जय लंकेश, जय रावण बाबा लिखवाते हैं। यहां के लोगों के वाहनों, मकानों और दुकानों पर भी जय लंकेश, जय रावन लिखा होता है। रावण गांव में दशहरा के मौके पर रावण की पूजा की जाती है और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है।

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