Saturday 7th of November 2026 04:17:24 PM

Breaking News
  •  4 नवम्बर को बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन गोरखपुर आयेंगे |
  • कर्नाटक में दिवाली पर रात 8 बजे से 10 तक ही ग्रीन पटाखे जलाने का आदेश |
  • 200 करोड़ की वसूली केस में नोरा फतेही को दिल्ली कोर्ट का समन,6 नवम्बर को पेशी |
Facebook Comments
By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 18 Aug 2023 5:06 PM |   1194 views

गाजर घास को नियंत्रण करना नितान्त आवश्यक है -शशांक चौधरी

संत कबीर नगर – जिला कृषि रक्षा अधिकारी शशांक चौधरी ने जनपद के किसान भाईयों को गाजर घास (Parthenium hysterophors) से होने वाले दूष्प्रभाव  के बारे में अवगत कराया है कि यह एक घास है जो बड़े आक्रामक तरीके से फैलती है गाजर घास फसलों के अलावा मनुष्यों एवं पशुओं के लिए गम्भीर समस्या है |
 
इस घास के सम्पर्क में आने पर मनुष्यों में चर्म रोग, क्षय रोग, दमा, सूजन आदि रोग हो जाता है। उन्होंने बताया कि गाजर घास एक राष्ट्रीय समस्या है, जिसका नियंत्रण करना नितान्त आवश्यक है।
 
उन्होंने बताया कि वर्षा ऋतु में गाजर घास को फूल आने से पहले जड़ से उखाड़कर कम्पोस्ट एवं वर्मी कम्पोस्ट बनाना चाहिए, वर्षा आधारित क्षेत्रों में शीघ्र बढ़ने वाली फसलें जैसे-ऊँचा, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि की फसलें लेनी चाहिए, अक्टूबर-नवम्बर में अकृषित क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मक पौधे जैसे चकौढ़ा (सेन्ना सिरसिया) के बीज एकत्रित कर उन्हें फरवरी मार्च में छिड़क देना चाहिए।
 
यह वनस्पतियाँ गाजर घास की वृद्धि एवं विकास को रोकती है, घर के आस पास बगीचे उद्यान एवं संरक्षित क्षेत्रों में गेंदे के पौधे लगाकर गाजर घास के फैलाव एवं वृद्धि को रोका जा सकता है एवं रसायनिक नियंत्रण हेतु ग्लाइफोसेट (1 से 1.5 प्रतिशत) अथवा मेद्रव्यूजिन (0.3से0.5 प्रतिशत) का छिड़काव करायें|
 
जैविक नियंत्रण हेतु मैक्सिकन बीटल (जाइगोग्रामा बाइक्लोराटा) नामक कीट को वर्षा ऋतु में घास पर छोड़ना चाहिए तथा अपने परिसर को गाजर घास से मुक्त करने के लिए सभी सम्भव प्रयास करें ताकि इस हानिकारक घास की क्षति से बचा जा सके।
Facebook Comments