Saturday 28th of February 2026 06:38:39 PM

Breaking News
  • आम आदमी पार्टी के जश्न पर सीबीआई का ब्रेक , अरविन्द केजरीवाल की रिहाई के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची जांच एजेंसी|
  • दिल्ली में शराब हो सकती हैं महंगी |
  • सोशल मीडिया उपयोगकर्ता रहे सावधान – न्यायपालिका पर अभद्र टिप्पणी करना पड़ेगा भारी ,हाईकोर्ट ने दी सख्त चेतावनी |
Facebook Comments
By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 17 Jun 2022 6:18 PM |   465 views

महारानी लक्ष्मीबाई का अवदान विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया

प्रयागराज – रानी लक्ष्मीबाई महान वीरांगना थी । आज उस वीरांगना को याद करना भारतवर्ष के लिए महान उपलब्धि है। रानी लक्ष्मीबाई का व्यक्तित्व बहुत विराट था। उनके पास सागर जैसा ज्ञान था और जीवन बहुत छोटा लेकिन प्रेरणादायी था।
 
उक्त उद्गार उत्तर प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने व्यक्त किए।
श्रीमती तिवारी उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में शुक्रवार को  स्वतंत्रता आंदोलन में महारानी लक्ष्मीबाई का अवदान विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। श्रीमती तिवारी ने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई का व्यक्तित्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। 
 
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती तिवारी ने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक की भूमिका बहुत बड़ी है। शिक्षक के ऊपर ही चरित्र निर्माण की भी जिम्मेदारी है। श्रीमती तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी समझ रहे हैं और राष्ट्र के विकास में अपना पूरा वक्त दे रहे हैं। सरकार की उज्ज्वला योजना एवं जनधन खाते से महिलाओं के बहुत बड़े तबके को काफी राहत मिली है।
 
उन्होंने कहा कि समस्या को बढ़ाने वालों का वक्त अब चला गया । अब तो समस्या का समाधान बहुत जरूरी है। हम अपनी जिम्मेदारी किसी और पर थोप कर बच नहीं सकते। 
 
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह ने कहा कि महिलाओं को महारानी लक्ष्मीबाई के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए। महारानी का कोई एक गुण अपने जीवन में जरूर अपनाएं। महारानी लक्ष्मी बाई के अंदर देश के प्रति समर्पण भरा था।
 
उन्होंने कहा कि बदलते वक्त के साथ आज महिलाएं बहुत सशक्त हो गई हैं और सबसे आगे हैं। उन्होंने सुभद्रा कुमारी चौहान की काव्य पंक्तियों को गुनगुना कर श्रोताओं में जोश भर दिया।
 
विशिष्ट वक्ता कवि एवं गीतकार डॉ श्लेश गौतम ने कहा कि स्वतंत्रता के समय रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के साथ-साथ अपने सम्मान के लिए भी संघर्ष किया। रानी लक्ष्मीबाई का योगदान कालातीत है । उनके अवदान को किसी तराजू में हम माप नहीं सकते।
 
विशिष्ट वक्ता साहित्यकार  रविनंदन ने रानी लक्ष्मीबाई 1857 के शहीदों में ऐसी क्रांतिकारी रहीं जिनको बच्चा-बच्चा जानता है लेकिन यह सत्य है कि रानी लक्ष्मीबाई का सही मूल्यांकन नहीं हुआ। इतिहास के पुनर्लेखन के लिए जो भी साहित्य, दस्तावेज हमारे पास उपलब्ध हैं, उनका विश्लेषण व पुनरावलोकन होना चाहिए।
 
उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय एवं हिंदुस्तानी एकेडमी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में अतिथियों का स्वागत हिंदुस्तानी एकेडमी के सचिव  देवेंद्र प्रताप सिंह ने किया।
 
विषय प्रवर्तन एवं कार्यक्रम का संचालन संगोष्ठी के संयोजक  प्रोफेसर पीके पांडेय, आचार्य, शिक्षा विद्या शाखा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव, प्रोफेसर पी पी दुबे ने किया। प्रारंभ में राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा राज्य मंत्री  रजनी तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया।
 
Facebook Comments