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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 29 Nov 4:57 PM |   17 views

पूर्वांच्चल में ड्रैगनफ्रूट की खेती की अपार सम्भावनाएः प्रो. रवि प्रकाश

आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या  द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र सोहाँव बलिया के अध्यक्ष प्रोफेसर रवि प्रकाश मौर्य ने  बाराबंकी जनपद के   देवाशरीफ के पास मोहम्मदपुर के प्रगतिशील किसान  गया प्रसाद मौर्य के  ड्रैगनफ्रूट  प्रक्षेत्र का अवलोकन  किया तथा वारिकियों को जाना ।
 
नवीं तक पढाई किये गया प्रसाद   2.5 एकड़ खेत में गेहूं धान सब्जियों के साथ देशी गुलाब फूल की खेती करते हूँ जो देवा शरीफ मे नियमित रूप में देशी गुलाब  वर्ष भर रू50 /प्रति किलो की दर में घर से ही बिकता है। गुलाब जल भी बनाते हैं। सुगंधित गुलाब जल के लिए रानीसाहिबा एवं नूरजहाँ प्रजाति उपयुक्त है। उन्होंने बताया कि  4 वर्ष पूर्व सीमैप लखनऊ किसान मेले से एक पौधा ड्रैगनफ्रूट का लाये थे। उसमें 6 फल लगे जो देखने में आकर्षक खाने में स्वादिष्ट तथा पौष्टिक था।
 
इसकी खेती में न तो अधिक उर्वरक, बीज कृषि रसायनों की आवश्यकता है, न ही जानवरों द्वारा नुकसान होता है । नागफनी के कुल का पौधा होने के कारण कम पानी की आवश्यकता होती है ।मात्र 1 हे. जमीन होने के कारण वे अपने परिवार की आवश्यकता भर खाद्यान्न फसलों की तथा व्यावसायिक रूप में गुलाब, ग्लेडिलस गेंदा फूलों,सभी सब्जियों तथा सहजन की खेती करते  है । काला गेहूं, तथा काला चावल भी उगाते है।
 
ड्रैगनफ्रूट के बारे मे बताया कि  पौधे 10×10 फुट पर लगाने के कारण काफी स्थान मिल जाता है बीच में धनिया पालक प्याज के लिए पर्याप्त स्थान मिल जाता है। बायो डीकम्पोजर से फसल अवशेषों को सड़ाने, वर्मी कम्पोस्ट, जैव उर्वरकों के साथ कम्पोस्ट का प्रयोग करते है।जीवामृत, घनजीवामृत तैयार करते हैं, जो उर्वरकों के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
 
ड्रैगनफ्रूट की खेती में समस्त जल विलेय उर्वरकों सागरिका अमीनो एसिड का ही उपयोग होता है । बीमारी के रूप में फंगस लगता है । समय समय पर फंगस की दवाओं का प्रयोग किया जाता है । ड्रैगनफ्रूट के पौधे 25 वर्षो तक जीवित रहते हुए फल दे सकते हैं । फलस्वरूप प्रति वर्ष फसल की लागत में कमी होती जाती है और लाभ बढता जाता है। जल विलेय उर्वरकों सागरिका अत्यंत सस्ते विश्वसनीय तथा प्रभावी हैं । 
 
वर्तमान समय में 1600 पौधों में फल आ रहा है। रू 300 प्रति किग्रा  की दर से फल लखनऊ में बिक जाते है। अभी नवम्बर तक 40 कुन्टल  फल प्राप्त होने की संभावना है ।
 
बाराबंकी जनपद में ड्रैगनफ्रूट की खेती की शुरुआत  गया प्रसाद ने  की तथा बताया कि  प्रदेश के वाराणसी, कुशीनगर, गोरखपुर, बलरामपुर, अयोध्या, लखनऊ रायबरेली, सीतापुर,जालौन आदि जिलों से किसान इनकी  खेती को देखने सीखने तथा इसके बारे में जानकारी लेने हेतु आते हैं । अबतक एक फल का वजन 800 ग्राम अभिलेखों में बताया गया है ।मेरे फलों का वजन 750 ग्राम तक है ।
 
किसान भाईयों को मेरी सलाह है कि ड्रैगनफ्रूट की खेती करें, यह अत्यंत लाभकारी नकदी खेती है । पौधों की व्यवस्था मेरे यहां भी है,आप बाहर से भी मँगा सकते हैं । प्रति पौधा रू.60 -75/ में है ।
 
किसी भी जानकारी तथा सलाह के लिए  मोबाइल नंबर:-9919257513 ,9119974955 पर सम्पर्क कर सकते है।
 
प्रो.रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि गया प्रसाद जी एक आगन्तुक भ्रमण पंजिका बनाये है ,जिसमें उनके प्रक्षेत्र पर आने वालों अधिकारियों ,किसानों  के नाम पता मोबाइल नं के साथ -साथ  उनका प्रक्षेत्र अवलोकन के बाद कैसा लगा लिखा जाता है। जो बहुत ही सराहनीय कार्य है। हमने ड्रैगनफ्रूट भी खाया जो मीठा एवं काफी स्वादिष्ट लगा।
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