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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 14 Nov 2021 5:13 PM |   723 views

तन्हाईयां

यादों के समन्दर में डुबाती हैं तन्हाईयां
ख्वाबों को सितारों से सजाती हैं तन्हाईयां
प्रतिकूल फिज़ाओं के बादलों की बरसात से
तरबतर भींगने से भी बचाती हैं तन्हाईयां
 
शहर की भीड़- भाड़ और शोर- गुल की घुटन से
बढ़ा कर के दूरियाँ मुस्कुराती हैं तन्हाईयां
दिल दिमाग हो बोझिल तरह तरह के मशवरों से
दोस्त की तरह सही राह दिखाती हैं तन्हाईयां
 
जख्मों को भी जख्मी करते तीर जमाने के
इलाज़ बदे मौन सरगम सुनाती हैं तन्हाईयां
मन हो बेचैन जब कल्पना की उड़ान भरने को
सुनहरी तितलियाँ नभ में उड़ाती हैं तन्हाईयां
 
गर चादर अपनी फैलाए ग़मों का अन्धेरा
एक खुशनुमा रौशनी बिखराती हैं तन्हाईयां
बेवफाई के दौर में मुंह मोड़ती जब हकीकत
वफ़ा की राह पर चलना सिखाती हैं तन्हाईयां
 
पांव “आग्नेय” के करने लगते हैं थकान
अपने बचपन को वापस बुलाती हैं तन्हाईयां
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