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By : nar singh | Published Date : 21 Jun 12:21 PM |   315 views

योग

संयुक्तराष्ट्र संघ ने योग दिवस को अधिकारिक मान्यता देकर हमारी प्राचीन गौरवशाली संस्कृति को विश्व मानस पटल पर स्थापित करने का महान कार्य किया है | भारतीय संस्कृति  की आत्मा है ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः “इसको समझने की प्रेरणा मिलेगी |

आजकल योग के बारे में कई प्रकार के विचार देखने को मिलतें है , जिनमे कुछ भ्रांतियां भी हैं |योग क्या है ?इसे सही रूप में समझने का योग दिवस एक अवसर है |सर्वप्रथम सदाशिव ने योग को ” संयोगो योगो इत्युक्तो जीवात्मा परमात्मन :के रूप में परिभाषित किया |श्रीकृष्ण ने योग को योग : कर्मेशु कौशलम कहा |महर्षि पतंजलि ने योग के महत्व को समझा और योग को आगे बढाया |महर्षि ने कहा -योग्श्च चित्त वृति निरोध :योग के आठो अंगो को श्रृखला बद्ध किया |जैसे – यम , नियम , आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार ,धारणा ,ध्यान और समाधि |

आजकल योग के नाम पर सिर्फ आसन या व्यायाम किया जा रहा है योग बहुत ही सूक्ष्म वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है |आसन का चुनाव मनुष्य के आंतरिक वृति और शारीरिक रोग के अनुसार होना चाहिए |आसन का सही चुनाव नही होने पर लोग संकट में पड़ सकतें हैं |योगासन का अभ्यास मंच और टी. वी. पर देखकर नही करना चाहिए | क्योकि आज योग के नाम पर मार्केटिंग हो रही है ,योग गुरु बनने की होड़ लगी है |जो भारतीय सभ्यता और संस्कृति का हनन है |

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