Sunday 6th of September 2026 06:50:46 AM

Breaking News
  • सर्वोच्च न्यायालय ने नीट पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों की FIR रद्द करने का आदेश दिया |
  • गोरखपुर में 2027 में बड़ी जीत के लिए बीजेपी ने शुरू की तैयारी|
  • चंदौली में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के पार |
Facebook Comments
By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 14 Jun 5:47 PM |   764 views

पूर्वाच्चल में प्रचलित हो रहा है संडा विधि से धान की रोपाई

बलिया -पूर्वी उत्तर प्रदेशक्षके कुछ जनपदों में संडा विधि से धान की खेती किसानों के बीच प्रचलित हो रही है।
 
आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र सोहाँव , बलिया के अध्यक्ष प्रोफेसर (डा.)रवि प्रकाश मौर्य  का कहना है कि पूर्वाच्चल की  कृषि जलवायु  क्षेत्र में धान की फसल को  जुलाई के प्रारंभ  से लेकर  मध्य अक्टूबर तक लगभग 100 दिनों तक अत्यधिक नम  अवस्था का सामना करना पड़ता है। इन क्षेत्रों में धान की खेती उपरहान  (ऊच्ची जमीन) या नीचले  खेतों मे की जाती है। उपरहार खेतों  में मानसून आने के बाद लम्बे ब्रेक की स्थिति में  धान की फसल में  पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। वही दूसरी तरफ नीचले खेतों  में बहुत अधिक पानी हो जाने से रोपाई में बिलम्ब हो जाता है।इन दोनों परिस्थितियों में  धान के पौधों में कल्ले कम निकलते है।बढ़वार अच्छी न होने के कारण पैदावार  बहुत कम हो जाती है। इस मौसम के बदलते परिवेश में ग्लोबल वार्मिग एवं जल की कमी को देखते हुए कृषक डबल ट्रांसप्लान्टिग  करने की कोशिश कर यह है। जिसे स्थानीय भाषा में सन्डा रोपाई कहा जाता है। इस विधि में पूर्व में रोपे गये पौधे  से कल्लों को  अलग करके रोपाई दुबारा की जाती है।इस तरह से रोपे धान के पौधो में जल की अधिकता एवं कमी दोनों  स्थितियों के साथ साथ अधिक तापमान को सहने की क्षमता बढ़ जाती है। परन्तु अब भी बहुत से किसान इसे समुचित ढंग से नही कर रहे है।
 
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी द्वारा किये गये शोध परीक्षण के आधार पर 3 सप्ताह की पौधे की  नर्सरी  समान्य  दूरी पंक्ति से पंक्ति 20 से.मी. ,पौधे से पौधे की दूरी 10 से.मी.पर रोपाई  करें एवं दूसरी रोपाई पहले रोपे गये धान के  3 सप्ताह बाद करें। इससे अधिक दिन के पौधे/ कल्ले  लगाने पर उपज मे गिरावट आ जाती है।
 
दूसरी बार रोपाई की दूरी नजदीक रखे पंक्ति से पंक्ति एवं पौधे से पौधे कि दूरी 10-10 सेमी रखनी चाहिए।किसानों के अनुसार  इस विधि से खेती करने से कई लाभ हैं। धान में पइया निकलने की सम्भावना बहुत कम होती है। रोग व खेत में पानी लगने की स्थिति में भी पौधों में गलन अपेक्षाकृत कम होती है तथा पैदावार भी सवा से डेढ़ गुना अधिक होती है तथा बीज की मात्रा भी काफी कम लगती है। इन सभी लाभों से बढ़कर यह लाभ है कि धान की खेती के बाद की जाने वाली आलू या गेहूं की खेती समय से की जा सकती है।
Facebook Comments