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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 26 Mar 2021 6:10 PM |   1023 views

महादेवी वर्मा की जयंती मनायी गयी

बलिया -आज छायावाद की विदुषी महादेवी वर्मा की जयंती डॉ. आदित्य कुमार  अंशु’ की अध्यक्षता में चित्रगुप्त एजूकेश नल टेम्पल में मनायी गयी | कार्यक्रम का संचालन रोमित हिमकर (बस्ती) ने किया |

महादेवी वर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में २६ मार्च १९०७ को कायस्थ परिवार में हुआ था| इनके पिता  गोविन्द प्रसाद वर्मा तथा माता श्रीमती हेमरानी देवी एक विदुषी महिला थीं | इनके सन्दर्भ में राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त ने लिखा है |

सहज भिन्न दो महा देवियां एक रूप में मिली मुझे|
बता बहिन “साहित्य शारदा ” या काव्य श्री कहूँ तुझे|

इस गोष्ठी में क्षेत्र के अनेक प्रबुद्ध विद्वान जन उपस्थित थे | केरल से पधारे  प्रवीण ने कहा कि महादेवी वर्मा का जीवन संघर्षों से भरा था| महादेवी वर्मा की शादी अल्पायु में हो गई फिर भी साहित्य साधना नहीं छोड़ी |

विद्यालय के प्रबंधक  पंकज श्रीवास्तव ने महादेवी वर्मा को  साहित्यकार के साथ-साथ एक कुशल चित्रकार भी बताया|

पश्चिम बंगाल से आये सत्येंद्र कुमार सिंह और  पूजा सिंह ने  महादेवी वर्मा के प्रति अपने उद्गार व्यक्त किए|  पंचानंद यादव , अशोक सिंह, हरेराम यादव, भोला यादव, राजू श्रीवास्तव, सविता, रेनू आदि ने अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किये।

अन्त में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ आदित्य कुमार ‘अंशु’ ने कहा कि महादेवी वर्मा मानवीय संवेदना की पोषक थीं। छायावादी कविता के चार स्तम्भ में महादेवी की भूमिका मुख्य थी। छायावाद की चादर ओढ़ने के बाद वे जीवन भर इस चादर को ओढ़े रहीं। इस चादर को कभी नहीं उतारा। संचालक रोमित हिमकर ने महादेवी वर्मा की प्रसिद्ध गीत

“मैं नीर भरी दु:ख की बदली
स्पंदन में चिर निस्पन्द बसा”को सस्वर सुनाकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया |

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