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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 16 Oct 2020 4:32 PM |   876 views

 गोबर की खाद

रमेश व सुरेश दोनों घनिष्ठ मित्र व सहपाठी थे। रमेश को बचपन से ही कविताएं लिखने का शौक था। कभी कभी अपनी लिखी कविता को लाकर सुनाता तो सुरेश ठहाका लगा कर हंसता और कहता कि” चलो, पागलों की संख्या में एक वृद्धि हो गई।
 
सुरेश खेलने का शौकीन था। अक्सर किसी न किसी खेल में पुरस्कार जीत कर लाता और रमेश का मज़ाक उड़ाते हुए कहता कि” कविता लिखना पागलों का काम है। सारे पागल कविता लिख कर मर ग‌ए और हम लोगों के लिए मुसीबत बन ग‌ए। अब उनको पढ़ना पड़ता है परीक्षा देनी पड़ती है।उनकी व्याख्या, समीक्षा, भाषा शैली इत्यादि रटना पड़ता है। मेरे मित्र रमेश एक दिन छात्रों के लिए तुम भी मुसीबत बन जाओगे।
 
रमेश मुस्कुराते हुए कहता कि” मैं मुसीबत बनने के लिए नहीं लिखता बल्कि स्वान्तः सुखाय लिखता हूं।”इस तरह समय बीतता गया। रमेश बड़ा हो कर एक प्रतिस्थापित कवि बन गया। दोनों की नौकरी भी एक ही विभाग में लग ग‌ई।उनकी दोस्ती और भी प्रगाढ़ हो गई। एक दूजे के घर आना जाना होता रहता था।
 
एक दिन रमेश सुरेश के घर गया और कहा कि” देखो अभी अभी एक कविता का जन्म जरा सुन लो तब चाय पिलाना।”रमेश की बात सुनकर सुरेश की पत्नी भी आकर कविता सुनने लगी। उसके बाद सुरेश की पत्नी अपनी लिखी हुई कविताएं रमेश को दिखाने और सुनाने लगी।
 
इसके रमेश ने सुरेश की पत्नी की भरपूर तारीफ़ किया और जहां तहां कवि सम्मेलन हेतु आमंत्रण भी भिजवाने लगा। अपनी पत्नी के साथ सुरेश भी जाता लेकिन मंच पर कवियों के साथ सुरेश की पत्नी और रमेश बैठता और सुरेश मंच के नीचे श्रोताओं के बीच बैठता।
 
अक्सर मंच पर रमेश और सुरेश की पत्नी को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया जाता। बार- बार यह देख कर सुरेश को बड़ी आत्मग्लानि हुई और सोचने लगा कि मेरा खेलना कूदना तो सब बेकार है, उम्र ढलने पर यह काम नहीं आएगा लेकिन कविता लिखने और सम्मानित होने का काम तो आजीवन चलता रहेगा।
 
एक दिन सुरेश रमेश के घर जाकर पूछा कि” ग़ज़ल का अर्थ क्या है?” रमेश ने बताया कि” प्रिया से बातचीत।”रमेश ने कहा कि” इसका मतलब कि एक लाइन मैं बोलू और दूसरी लाइन वो बोले तो एक शेर बन जाएगा। इसी तरह कुछ शेर बन जाए तो ग़ज़ल तैयार हो जाएगी।” रमेश ने हामी भर दी।
 
सुरेश ने कहा कि” एक लाइन बताओ जिसे मैं घर जाकर कहूं तो पत्नी जवाब देगी तो एक शेर बन जाएगा।इस तरह क‌ई ग़ज़लें तैयार हो जाएगी तो मैं कवि मंच पर बैठूंगा तुम लोगों के साथ। रमेश ने एक लाइन बताया कि” जो देखेगा तुझको तुझे नभ का चांद कहेगा।
 
सुरेश मन ही मन प्रसन्न था घर पहुंच कर पत्नी के सामने आते ही बोला कि” जो देखेगा तुझको तुझे नभ का चांद कहेगा।
 
पत्नी ने तुरंत जवाब दिया कि” और जो देखेगा तुझको गोबर की खाद कहेगा ।
 
 ( डाॅ0 भोला प्रसाद आग्नेय )
 
 
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