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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 22 May 11:48 AM |   778 views

अरहर की उन्नत खेती

 
प्रजातियाँ –  
कम अवधि वाली (125-140 दिन) % ]पूसा 84, मानक,  पूसा 992, इत्यादि
लम्बी अवधि वाली (240-275) बहार,  मालवीय अरहर-१३, नरेन्द्र अरहर 1, नरेन्द्र अरहर २, आई पी ए 203 आदि |
बीज दर- 
कम अवधि वाली -12=15 किग्रा /  हेक्टयर, 
लम्बी अवधि वाली % १०-12 10&12 किग्रा / हेक्टयर
बीज उपचार-  2.0 ग्राम थिरम,या  २.0  xzke  या 10 ग्राम ट्राईकोडर्मा प्रति किग्रा बीज की दर से उपचारित करे इसके पश्चात२००-२५० ग्राम राइजोबियम कल्चर प्रति १० किग्रा बीज की दर से भी उपचारित करना चाहिए ।
 
बुवाई का समय-  15 जून से 15 जुलाई 
पंक्ति से पंक्ति एवं पौध से पौध दूरी-  कम अवधि वाली –  % 45 से 60 सेमी पंक्ति से पंक्ति एवं १० से 15 सेमी पौध से पौध  |
लम्बी अवधि वाली % 80 से 90 पंक्ति से पंक्ति एवं 20 से 25 सेमी पौध से पौध
लंतुति उर्बरक की मात्र 20 किग्रा नत्रजन, 50 किग्रा फास्फोरस, 20 किग्रा पोटाश तथा 20 किग्रा सल्फर प्रति हेक्टयर प्रयोग करना चाहिए।
 
सिंचाई-  बरसात के अभाव में फली बनते समय एक सिंचाई अवश्य करें।
 
खर–पतवार नियंत्रण-  पेंडीमेथलीन 30 ई सी की 3.3 लीटर को 800 लीटर पानी में घोल बनाकर अंकुरण से पूर्व या बुवाई के 24 घंटे के अंदर फ्लैट फेन नोजिल से नमी की दशा में छिड़काव करें। अथवा एक माह के अंदर खुरपी से निराई करना चाहिए। अधिक खर-पतवार की दशा में इमिज़ेथापर नामक दवा की 75 ग्राम ए आई बुवाई के 20 दिन बाद करें ।
 
पत्ती लपेटक एवं  फली बेधक कीट  इन  कीटो  का प्रकोप होने पर b.डोक्साकार्ब 15.8 ई सी की एक मिली मात्रा को प्रति bZ-lh को 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए |
 
उकठा-  उकठा लगने वाले खेतो में 3-4 वर्ष तक अरहर नहीं बोना चाहिए। ट्राईकोडरमा से मृदा अवम बीज का उपचार करना चाहिए |
 
बाँझ / चित्तेरी रोग-  रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़ कर नष्ट कर देना चाहिए। फसल की प्रारम्भिक अवस्था में कैल्थेन या मेटासिस्टोक्स कीट नाशको का 0.1 प्रतिशत का छिड़काव 10-15 दिनों के अन्तराल पर करना चाहिए|
 
उपज- कम अवधि वाली- 15-20 कुन्तल प्रति हेक्टेयर |
लम्बी अवधि वाली-  15-20 कुन्तल प्रति हेक्टेयर |
 
(प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र, मल्हना देवरिया )
 
 
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