Friday 24th of July 2026 03:36:01 PM

Breaking News
  • कांग्रेस का धरना ख़त्म ,हिरासत में राहुल गाँधी ,प्रियंका और अखिलेश |
  • दिल्ली प्रोटेस्ट में घायल बच्चों की मदद के लिए केजरीवाल का बड़ा ऐलान -मेडिकल और लीगल हेल्प का वादा |
  • मध्यप्रदेश विधानसभा में पारित किया समान नागरिक संहिता विधेयक |
Facebook Comments
By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 2 May 2020 7:35 AM |   823 views

भूख और रोटियां

भूख से तड़पा है बच्चा माँगता कुछ रोटियाँ,
एक निवाले के लिये  दर-दर से मांँगे रोटियाँ।
 
है नहीं कोई जहाँ में जिसको अपना कह सके,
ढूंढती आँखें उसे अब जो खिला दें रोटियाँ।।
 
दर्द उसने ही दिया जो जन्म देकर मर गई,
मैं अकेला इस जहाँ में जान मेरी रोटियाँ।।
 
सीने से चिपका के मुझको दे गई कैसी दुआ,
आज मैं दर- दर पे भटकूँ चाह है बस रोटियाँ।।
 
छोड़ मुझको इस जहाँ में क्यूँ सभी तड़पा रहे,
कोई अपना ले जहाँ में दे के मुझको रोटियाँ।।
 
आसरा मिलता नहीं ठोकर हूँ खाता रात- दिन,
एक निवाला प्यार का बनती सहारा रोटियाँ।।
 
भूख से बेहाल होकर रो रहा हूँ आज मैं,,
महल चौबारे पे देखो फेंकी जाती रोटियाँ।।
 
जिंदगी को खाक करने की है जिसमें आग भी,
आग ऐसी ही बुझाती *यश* सदा ये रोटियाँ।
 
(यशपाल सिंह चौहान, असिस्टेंट कमांडेंट , सीमा सुरक्षा बल ,नई दिल्ली )
 
 
 
Facebook Comments