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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 26 May 6:08 PM |   670 views

यास तूफान से बलिया भी हो रहा प्रभावित

बलिया -मौसम वैज्ञानिकों के  अनुसार  बंगाल की खाड़ी से उठा ‘यास’ तूफान पूर्वांचल को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया  है। मौसम विभाग ने पूर्वांच्चल के जनपदों को इससे अलर्ट करते हुए तूफान से  निपटने की तैयारी करने का सुझाव दिया है।  इधर पूर्वांचल के अधिकांश जिलों में तेज धूप और नमी के मेल ने पूर्वांच्चल का ताप मान बढ़ा दिया था । गर्मी को शांत करने के लिए बंगाल की खाड़ी में ‘यास’ नाम  के चक्रवाती तूफान की परिस्थितियां तैयार हो गई हैं।
 
आज  26 मई को  काले घने बादलों के साथ-साथ कही- कही  बूंदाबादी का सिलसिला  रूक रूक कर शुरू हो गया है।,  धरातल पर गर्मी की वजह से वह नमी बादलों में तब्दील कर दिया है ,जिसके चलते   बूंदाबादी शुरू हो गयी है  और फिर 27 से रूक-रूक कर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला चलेगा जो 29 मई को जाकर थमेगा। 
 
आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र सोहाँव बलिया के अध्यक्ष ,प्रोफेसर (डा.) रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि  किसान भाई मौसम की जानकारी सदैव लेते रहे तथा मौसम  पूर्वानुमान  को ध्यान में रख कर खेती सम्बंधित कार्य करें। यदि किसी फसल मे सिंचाई की आवश्यकता हो तो यास तुफान को देख ले ,बर्षा होने पर सिंचाई की आवश्यकता नही होगी। खेत की गहरी जुताई नही कर पाये हो तो अभी रुक जाये क्योकि बरषा होने पर पुनः खरपतवार उग आयेंगे। बर्षा होने के बाद मौसम ठीक होने पर भूमि जुताई योग्य होने पर गहरी जुताई करने से बर्षा के कारण उगे हुए खरपतवार धूप से नष्ट हो जायेंगे। धान की नर्सरी हेतु खेत की तैयारी कर प्रजातियों के अनुसार नर्सरी डालें।
 
रूक रूक कर बर्षा होना या भारी बरसात  सब्जियों का दुश्मन है। वर्तमान में लता वर्गीय सब्जियां जैसे लौकी,कद्दू ,करेला, तोरई, परवल आदि  अधिकांशतः किसान समतल जमीन पर लगाये है,  जिसमें  जलभराव या अधिक पानी के कारण पौधो का पीलापन के साथ- साथ रोग तथा कीट की संभावना अधिक बढ़ जाने की संम्भावना  है। ऐसी स्थिति में  लताओं को बांस के पोल बनाकर सहारा दे तथा जड़ के पास की मिट्टी को ऊंचा करें जिससे जड़ में पानी कम से कम पहुंचे।
 
पपीता एवं अन्य नाजुक छोटे पौधों की जड़ों पर मिट्टी चढा दे जिससे जड़ के पास पानी एकत्र न हो। ज्यादा मौसम खराब होने ,बर्षा होने , बिजली चमने पर घर से बाहर न निकले,  पेड़ के नीचे न रहे।खराब मौसम  में पशुओं को भी (पशुबाड़े) घर में रखे।  मौसम ठीक होते ही खरीफ फसलों की तैयारी में युध्द स्तर पर जुट जाये।  
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