Wednesday 15th of April 2026 10:39:06 AM

Breaking News
  • 30 मई तक पूरा करें पहले चरण के वेदर स्टेशन बनाने का काम-सूर्य प्रताप शाही |
  • आज रात पूरी सभ्यता का अंत हो जायेगा -ट्रम्प|
  • उत्तरप्रदेश में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ा |
Facebook Comments
By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 31 Jul 5:41 PM |   677 views

पूर्वांचल मे मशरूम उत्पादन की अपार सम्भावना- प्रो.रवि प्रकाश

बलिया / सोहाव – मशरूम  को कुकुरमुत्ता, भूमिकवक, खुम्भ, खुम्भी आदि कई नामों से जाना जाता है।, प्रायः बरसात के दिनों में छतरीनुमा संरचनायें  सडे़ -गले कूडे़ के ढेरों पर या गोबर की खाद या लकडी़ पर देखने को मिलता है, जो एक तरह का वह भी मशरूम ही है। इसे आसानी से घर मे भी उगाया जा सकता है।मशरूम का प्रयोग सब्‍जी , पकौडा़ सूप के रूप  में किया जाता है। मशरूम खाने में स्‍वादिष्‍ट, सुगन्धि्त , मुलायम तथा पोषक तत्‍वों से भरपूर होती है। इसमें  वसा तथा शर्करा कम होने के कारण यह मोटापे, मधुमेह तथा रक्‍तचाप से पीड़ित व्‍यक्तियों के लिए आदर्श  शाकाहारी आहार है । व्‍यावसायिक रूप से तीन प्रकार की मशरूम उगाई जाती है। बटन मशरूम, ढींगरी  मशरूम तथा धान पुआल मशरूम। तीनों  प्रकार की मशरूम को किसी भी हवादार कमरे या सेड में आसानी से उगाया जा सकता है।
 
आचार्य नरेन्द्र देव कृषि  एवं प्रौधौगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित  कृषि विज्ञान केन्द्र सोहाँव  बलिया के अध्यक्ष  प्रो.रविप्रकाश मौर्य ने बताया कि ढींगरी मशरूम उगाने का सही  समय अक्‍टूुबर से मध्‍य अप्रैल के महीने हैं। सामान्‍यत: 1.5 किलोग्राम सूखे पुआल/भूसे  या 6 किलोग्राम गीले पुवाल/ भूसे से लगभग एक किलोग्राम ताजी मशरूम  आसानी से प्राप्‍त होती है। जिसकी कीमत रू 60-80 प्रति किग्रा. है। वटन मशरूम हेतु तैयारी  मध्य अगस्त माह से प्रारम्भ करते है।  एक  कुन्टल तैयार किये  कम्पोस्ट से 15-20 किग्रा. वटन मशरुम की उपज होती है ।उत्पादन खर्च प्रति किग्रा. रू 35-40/ ,  बिक्री दर रू100-150/,  शुध्द लाभ  रू65-100/ प्रति किग्रा. होता है।
 
प्रो.मौर्य ने बताया कि  पूर्वांचल  में  मशरूम उत्पादन करने की अपार सम्भावनाएँ है , लगभग सभी  जनपदो मे छिटपुट  ढिगरी एव़ वटन मशरूम की खेती हो रही है। जिसमे बाराबंकी, बस्ती ,एवं गोरखपुर जनपद अग्रणी है। किसानों के पास मशरूम  उत्पादन मे उपयोग होने  वाले अधिकतर संसाधन जैसे-भूसा, पुवाँल ,कम्पोस्ट ,बेसन  ,बाँस ,रस्सीआदि  उपलब्ध है। केवल  मशरूम का स्पान (बीज )  ही बाहर   ( बस्ती , लखनऊ या वाराणसी) से मंगाना पड़ेगा। उसमें प्रयोग होने वाले  उर्वरक,फफुँदीनाशक, स्थानीय बाजार मे उपलब्ध है। 
 
मशरूम की खेती करने का तरीका खाद्यान्न एवं बागवानी फसलों से बिल्कुल अलग है, अत़ः इसकी खेती की शुरूआत करने से पहले तकनीकी एवं व्याहारिक ज्ञान  हेतु प्रशिक्षण लेना लाभकारी होगा।  उक्त सभी बातों को ध्यान मे रखते हुए मशरूम की खेती मे रुची रखने  वाले  जनपद बलिया के वेरोजगार नवयुवकों  / नवयुवतियों  ,कृषकों /कृषक महिलाओं  एवं विशेष कर प्रवासी श्रमिकों हेतु कृषि विज्ञान केन्द्र सोहाँव  परिसर  में चार द्विवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण  18 से 21 अगस्त 2020  तक मशरूम के व्यावहारिक तकनीकी ज्ञान हेतु निः शुल्क रखा गया है। ईच्छुक व्यक्ति केन्द्र पर 10 अगस्त 2020 तक  सम्पर्क कर  पंजीकरण कराकर प्रशिक्षण मे  भाग ले सकते है। अन्य जनपदों के किसान मशरूम से सम्बंधित जानकारी के लिये अपने जनपद के कृषि विज्ञान केन्द्र  से सम्पर्क कर सकते है।
 
 
 
 
 
Facebook Comments