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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 1 May 2026 7:58 PM |   110 views

’’बौद्ध संग्रहालय में आयोजित शैक्षिक एवं रचनात्मक गतिविधियां समाज में सांस्कृतिक जागरूकता एवं संवर्धन को बढ़ावा देती हैं – डॉ0 मंगलेश

गोरखपुर -राजकीय बौद्ध संग्रहालय में आयोजित फोटोग्राफी कार्यशाला के प्रथम दिवस पर विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ0 तुलिका साहू असिस्टेन्ट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, रायबरेली, उत्तर प्रदेश द्वारा ’’संग्रहालय में फोटोग्राफीः फ्रेम से परे देखना (Seeing Beyond the Frame) विषय पर एक विशेष व्याख्यान एवं प्रशिक्षण दिया गया।  
 
बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर संग्रहालय में आयोजित धरोहर संग्रह प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं फोटोग्राफी कार्यशाला का शुभारम्भ गोरखपुर के  डॉ0 मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रह कर किया। उन्होंने दोनो कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की शैक्षिक एवं रचनात्मक गतिविधियां समाज में सांस्कृतिक जागरूकता एवं संवर्धन को बढ़ावा देती हैं। हमारी युवा पीढी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए तत्पर है, उसे सिर्फ एक कुशल मार्गदर्शन की आवश्यकता है, जोकि राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा अपने विभिन्न शैक्षिक आयोजनों के माध्यम से किया जा रहा है। धरोहर संग्रह के अवलोकन के समय महापौर द्वारा विभिन्न प्रकार की धरोहर का संग्रह करने की प्रवृत्ति के प्रति अपने अनुभवों को भी प्रतिभागियों से साझा किया गया।
 
डॉ0 तुलिका साहू ने कार्यशाला में संग्रहालयों में फोटोग्राफी के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने संग्रहालय में उपलब्ध प्रकाश के उचित एवं कलात्मक प्रयोग, विभिन्न कैमरा एंगल, तकनीकि, फ्लैश रिफ्लेक्ट एरिया तथा फोटोग्राफी के नियमों के पालन पर विशेष जोर दिया। साथ ही संग्रहालयों में फोटोग्राफी करते समय कलाकृतियों एवं चित्रों की गुणवत्ता और वास्तविकता बनाये रखने के प्रयास पर प्रकाश डाला।
 
उल्लेखनीय है कि करीब 18 वर्षों के शैक्षणिक अनुभव के साथ डॉ0 तुलिका साहू उत्तर प्रदेश की पहली महिला हैं जिन्होंने फोटोग्राफी के क्षेत्र में पी0एच0डी0 की उपाधि प्राप्त की है, जो उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं फोटोग्राफी के प्रति समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने अपना नाम लिम्का बुक एवं इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज करवाया है।
 
बौद्ध संग्रहालय में आज धरोहर संग्रह प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया, प्रदर्शनी में इतिहास, भारतीय दर्शन और संस्कृति को अभिव्यक्ति करने का प्रयास किया गया है। धरोहर संग्रह को प्रदर्शित किये जाने के उद्देश्य के बारे मे हिमांशु कुमार सिंह ने बताया कि युवा पीढी अपनी मूल संस्कृति से दूर होती जा रही है, ऐसे स्थिति मे यह प्रदर्शनी युवा पीढी के लिए ज्ञानवर्धक और संस्कृति से परिचय कराने का माध्यम बनेगी। देवरिया के हिमांशु कुमार सिंह लगभग 30 वर्षों से डाक टिकट  एवं धरोहर के विभिन्न स्वरूपों का संग्रह कर रहे हैं। हिमांशु कुमार सिंह राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय टिकट संग्रह पदक विजेता, गवर्नर ट्रॉफी विजेता एवं इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स दर्ज कराने वाले धरोहर संग्रहकर्ता हैं।
 
कार्यक्रम के संयोजक के रूप में डॉ0 यशवन्त सिंह राठौर, उप निदेशक, राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा अवगत कराया गया कि राजकीय बौद्ध संग्रहालय के प्रदर्शनी हाल में ’’धरोहर संग्रह’’ विषयक प्रदर्शनी में तथागत बुद्ध, भगवान राम एवं रामायण, नारी सशक्तिकरण, विभिन्न देशों के ध्वजों, एक जिला एक उत्पात, रेडक्रॉस, आजादी के गुमनाम नायक, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जीवन दर्शन आदि पर जारी विभिन्न देशों के डाक टिकट, प्रथम दिवस आवरण, विशेष आवरण, पोस्ट कार्ड के संग्रह को प्रदर्शित किया गया है। 
 
प्रदर्शनी के विशेष आकर्षण के रूप में भारत के साथ-साथ विभिन्न देशों की कागजी मुद्रा, सिक्के, स्मारकीय विशेष चांदी के सिक्के, पीतल के प्राचीन ताले, कैमरे, पात्र, कैलकुलेटर, माचिस आदि का दुर्लभ संग्रह भी प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में फिलेटलिक सुश्री आकृति गुप्ता द्वारा संग्रहित भारत की गुरू शिष्य परम्परा पर आधारित डाक सामग्री को भी स्थान दिया गया। धरोहर संग्रह प्रदर्शनी का अवलोकन 04 मई, 2026 तक संग्रहालय में निःशुल्क किया जा सकता है। 
 
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