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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 22 Apr 2026 7:20 PM |   19 views

संतुलित उर्वरक उपयोग से ही मिट्टी की सेहत और उत्पादन दोनों सुरक्षित रहेंगे: डॉ. मांधाता

देवरिया -भाकृअनुप-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान–कृषि विज्ञान केंद्र, देवरिया द्वारा आज ग्राम दनौर, विकास खंड भाटपार रानी में “उर्वरकों का संतुलित उपयोग” विषय पर कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर केंद्र के अध्यक्ष डॉ. मांधाता सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अच्छी फसल उत्पादन के लिए केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। पौधों को कुल 17 आवश्यक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिन्हें मुख्य, द्वितीयक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों में वर्गीकृत किया गया है। इन सभी पोषक तत्वों का मिट्टी में संतुलित मात्रा में उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसान संतुलित उर्वरक उपयोग के साथ-साथ हरी खाद (ढैंचा, सनई), गोबर की सड़ी हुई खाद, वर्मी कम्पोस्ट एवं कम्पोस्ट खाद का प्रयोग अवश्य करें, जिससे मिट्टी की उर्वरता एवं संरचना में सुधार होता है।

उन्होंने बताया कि लगातार केवल यूरिया के अधिक प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है, जबकि जैविक खादों के उपयोग से मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ती है, जल धारण क्षमता सुधरती है तथा दीर्घकाल में उत्पादन स्थिर रहता है।

कार्यक्रम में गृह विज्ञान विशेषज्ञ जय कुमार बताया कि संतुलित पोषक प्रबंधन न केवल उत्पादन बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि यह खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने का सबसे प्रभावी तरीका है।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें तथा रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैव उर्वरकों (राइजोबियम, पीएसबी) का समन्वित उपयोग अपनाएं, जिससे लागत कम होने के साथ-साथ उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

कार्यक्रम में सुंदर नाथ सिंह, कौशल यादव, राम नाथ, विकास, बबलू सिंह आदि किसान उपस्थित रहे।

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