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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 28 Mar 2026 7:32 PM |   379 views

आम के बागों का रखे ध्यान, कीट रोग से न हो नुकसान

आम को उत्कृष्ट स्वाद, सुगंध, आकर्षक रंग, पोषक गुणों एवं विभिन्न उपयोगों के कारण फलों का राजा कहा गया है| कहावत है आम के आम गुठलियों के दाम| अर्थात, आम के पत्तों का उपयोग पूजा, पाठ एवं अन्य शुभ अवसरों पर किया जाता है फलों का छोटे आकार से लेकर पकने तक खटाई, आचार, मुरब्बा, जूस, अमावट के रुप में प्रयोग किया जाता है|
 
प्रसार्ड ट्रस्ट मल्हनी देवरिया के निदेशक प्रोफेसर रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि आम की कम उत्पादकता के लिए मुख्य कारणों में पुराने अनुत्पादक बागों की अधिकता, पोषक तत्वों की कमी, अनियमित फलन,विभिन्न प्रकार के रोगों एवं कीटों का अधिक प्रकोप सम्मिलित है| वर्तमान समय में आम मटर के दाने या काँच की गोली के आकार के हो गये है| इस समय मौसम भी बदल रहा है, जो आम के फलों को प्रभावित करता है|
 
आम में भुनगा (हापर) कीट के प्रकोप होने की संभावना बनी रहती है| इसके शिशु एवं प्रौढ दोनों पौधे के कोमल भागों मे छेद कर रस चूसते है| पत्तियाँ मुरझा जाती है|
 
यह चिपचिपा, मीठा पदार्थ निकालते है, अप्रैल में इनकी संख्या ज्यादा हो जाती है, उच्च आर्द्रता, पुराने उपेक्षित एवं घने बगिचों में ज्यादा प्रकोप होता है|
 
फुदका कीट के प्रबंधन के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस. एल. 1 मिली /3 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें|
 
 आम में इस सभय पाउडी मिल्डू सेरोग भी सावधान रहना चाहिए! इसे खर्रा या दहिया रोग भी कहते है! यह रोग आम के फूलों के डंठल, नई पत्तियों और छोटे फलों को प्रभावित  करती हैं| बीमार पौधों के ऊपरोक्त भागों पर सफेद सतही धूल जैसा विकास होता है यह बीमारी हवा से | फैलती है युवा फलों के संक्रमित होने पर पूरी तरह सफेद धूल सा विकास हो जाता है| संक्रमित फलों की परत फट जाती है|
 
ऐसे फल मटर के आकार तक पेड़ पर रहते है और फिर गिर जाते है! रोग की गम्भीरता 3-4 दिनों तक उच्च आद्रता, बादल वाला मौसम और हवा का तेज चलना, न्यूनतम् तापमान 10-15 सेंटीग्रेड, अधिकतम 27-33 सेंटीग्रेड और आर्द्रता 65-80 प्रतिशत, रोग की गम्भीरता के लिए सबसे अनुकूल परिस्थितियां है| मार्च के दूसरे पखवारे में उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्र में इसकी तीव्रता सबसे अधिक होती है| इस रोग के प्रबंधन के लिए पहला छिड़काव धुलनशील गंधक 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल कर बौर जब 8-10 सेमी. का हो तो करें यदि आवश्यक हो तो दूसरा छिड़काव हेक्साकोनाज़ोल या डाइनोकैप 1 मिली. को प्रति लीटर पानी में घोलकर पहले छिड़काव के 10-15 दिन बाद करना चाहिए|
 
सामान्य सावधानियां:फूल आने के समय (फरवरी-मार्च) में सिंचाई न करें, इससे फूल झड़ सकते हैं।
बाग में जलभराव न होने दें।
 
कीटनाशकों का छिड़काव सुबह या शाम के समय करें। कीट एवं रोग के लिए एक साथ कीटनाशी एवं फफूँदीनाशी दोनों को मिला कर छिड़काव कर सकते है| पानी की मात्रा अलग -अलग नही रहेगा|
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