Monday 30th of March 2026 07:54:06 PM

Breaking News
  • भारत के टैंकर है आने दो ईरान ने दोस्त के लिए होर्मुज का रास्ता खोला |
  • बीजेपी सत्ता में आती है तो बुलडोजर चलवाती है -ममता बनर्जी |
  • बिहार के विद्यालयों में  वंदेमातरम् अनिवार्य|
Facebook Comments
By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 9 Feb 2026 7:47 PM |   237 views

संस्कृति का कोड होती हैं मुद्राएं- प्रो0 पूनम टंडन

गोरखपुर-राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर में ’’प्राचीन भारतीय अभिलेख एवं मुद्राएं-अभिरूचि कार्यशाला’’ राष्ट्रीय व्याख्यान श्रृंखला के अन्तर्गत आज प्रो0 प्रज्ञा चतुर्वेदी,विभागाध्यक्ष प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, दी0द0उ0गो0 वि0वि0, गोरखपुर द्वारा ’’ अभिलेखों एवं मुद्राओं के आलोक में वैष्णव धर्म का विकास’’ विषय पर विस्तृत सूचना प्रतिभागियों को उपलब्ध करायी गयी।
 
कार्यशाला का समापन सत्र मुख्य अतिथि प्रोफेसर पूनम टंडन माननीय कुलपति दी0द0उ0गो0 वि0वि0, गोरखपुर के कर कमलों द्वारा अपराह्न 11ः 30 बजे दीप प्रज्जवलन के साथ प्रारंभ हुआ|
 
कुलपति द्वारा कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले 70 सफल प्रतिभागियों को प्रमाण- पत्र प्रदान किए गए। साथ ही कार्यशाला में उत्कृष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले 06 प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सान्त्वना स्थान प्रदान करते हुए क्रमशः गायत्री सिंह, अनुराधा सिंह, वैष्णवी दुबे, प्रिया राव, संदीप कुमार सरोज एवं मुनील कुमार को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कुलपति द्वारा मुद्राओं का संग्रह करने, उनके बदलते स्वरूप एवं उनसे प्राप्त होने वाली सूचनाओं के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
 
कुलपति ने अपने उद्बोधन में कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग तथा राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सप्त दिवसीय कार्यशाला प्रतिभागियों एवं शोधार्थी के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध हुई है। इस प्रकार की कार्यशाला शोध कार्य की गुणवत्ता में न केवल वृद्धि करती है साथ ही उसका संवर्धन भी करती है। 
 
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो0 राजवंत राव द्वारा सभी सफल प्रतिभागियों को बधाई दी गई साथ ही कार्यशाला में हुए समस्त व्याख्यानों के विषय विशेषज्ञों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
 
कार्यशाला संयोजक के रूप में डॉ0 यशवन्त सिंह राठौर द्वारा सप्त दिवसीय कार्यशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। उनके द्वारा अवगत कराया गया, कि सात दिवसीय कार्यशाला के अंतर्गत विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा कुल 09 व्याख्यान अभिलेख एवं मुद्राओं से संबंधित इतिहास पर प्रस्तुत किए गए, साथ ही संग्रहालय की विभिन्न वीथिकाओं का सभी प्रतिभागियों को शैक्षिक भ्रमण भी कराया गया।
 
समापन अवसर पर प्रो0 सुजाता, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी एवं गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो0 रामप्यारे मिश्र, प्रो0 दिग्विजयनाथ मौर्य, प्रो0 कमलेश गौतम, डॉ0 पद्मजा, डॉ0 विनोद कुमार, डॉ0 मणिन्द्र यादव आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
 
समापन कार्यक्रम में प्रतिभागियों द्वारा कार्यशाला के अनुभव भी साझा किए गए। 
Facebook Comments