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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 5 Feb 2026 7:37 PM |   164 views

रेल ट्रैक पर आने वाले हाथियों के बचाव हेतु नई तकनीक

गोरखपुर- रेलवे प्रशासन वन्य जीव प्राणियों (हाथियों) की सुरक्षा हेतु महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। गाड़ी संचलन के दौरान रेल ट्रैक पर आने वाले हाथियों के बचाव हेतु नई तकनीक ए.आई. इनेबल्ड इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम का उपयोग कर रही है। पूर्वोत्तर रेलवे के 99.18 रूट किमी. पर ए.आई. इनेबल्ड इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम लगाया जायेगा।

ए.आई. इनेबल्ड इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम के द्वारा हाथियों की सुरक्षा बेहतर होगी। यह सिस्टम डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसर (डैस) के जरिये ट्रैक पर हाथियों के मौजूदगी का पता लगाता है। यह सिस्टम ऑप्टिकल फाइबर और पहले से फीड किये गये हाथियों की चाल के सिग्नेचर के आधार पर काम करता है और लोको पायलट, स्टेशन मास्टर एवं कंट्रोल रूम को तुरंत मैसेज भेजता है, ताकि समय रहते ट्रेन रोकी जा सके और हाथियों को बचाया जा सके। पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल के 99.18 रूट किमी. पर यह सिस्टम लगाया जायेगा।
 
पहले चरण में यह प्रणाली 24 रूट किमी. पर लगाई जा रही है, जिसमें लालकुआं-गुलरभोज 15.8 किमी., छतरपुर-हल्दी रोड 1.2 किमी., हल्दी रोड-लालकुआं 2.7 किमी., पंतनगर-लालकुआ 1.2 किमी., लालकुआं-हल्द्वानी 3.2 किमी. सम्मिलित है। काशीपुर-रामनगर तथा खटीमा-बनबसा खंड पर भी इसे लगाये जाने की प्रक्रिया चल रही है। 
 
रेलवे और वन विभाग की टीम मिलकर हाथियों को बचाने हेतु स्पीड लिमिट, साइन बोर्ड, अंडरपास, बाड़, हनी बी बजर डिवाइस तथा थर्मल कैमरों जैसे कई उपाये भी लागू कर रहे है, जिससे जंगली जानवरों को बचाना के साथ रेल संरक्षा को सुदृढ़ करना है। इसके लिए रेलवे प्रशासन द्वारा एलिफेंट कॉरिडोर बनाया गया है, जिससे प्रतिबंधित क्षेत्र में वन्यजीवों के साथ कोई दुर्घटना ना हो, इसके लिए भारतीय रेलवे तकनीक के जरिए ट्रैक पर वन्यजीवों, खासकर हाथियों के बचाव के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 
 
   
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