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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 7 Jan 2026 7:59 PM |   144 views

पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला 19 से 23 जनवरी तक आयोजित-जयवीर सिंह

लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार संस्कृति विभाग द्वारा अभिलेखों एवं पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण विषय पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 19 से 23 जनवरी तक किया जाएगा।
 
इस कार्यशाला का उद्देश्य मंत्री, संस्कृति एवं पर्यटन जयवीर सिंह की धरोहर संरक्षण के प्रति संवेदनशील दृष्टि को सुदृढ़ करना तथा विद्यार्थियों को अभिलेखीय एवं पांडुलिपि धरोहर के संरक्षण से जोड़ते हुए इस क्षेत्र में उपलब्ध रोज़गार एवं करियर के अवसरों के प्रति जागरूक करना है।
 
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रतिभागी भाग लेंगे, जिनमें विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी एवं शिक्षक सम्मिलित रहेंगे। प्रशिक्षण के दौरान रक्षा मंत्रालय के हिस्ट्री डिवीजन, राष्ट्रीय अभिलेखागार, भारत सरकार तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों से आमंत्रित विषय-विशेषज्ञ अभिलेखों एवं पांडुलिपियों की पहचान, संरक्षण, प्रलेखन, डिजिटलीकरण तथा उनके अकादमिक एवं शोधात्मक महत्व पर व्याख्यान एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित करेंगे।
 
कार्यक्रम का आयोजन ज्ञान भारतम मिशन के आलोक में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत भारत की प्राचीन एवं ऐतिहासिक ज्ञान-परंपरा, अभिलेखीय विरासत तथा पांडुलिपि धरोहरों के संरक्षण, पुनरुद्धार और व्यापक प्रसार पर विशेष बल दिया जा रहा है। इस दृष्टि से यह प्रशिक्षण कार्यशाला और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यह युवाओं को भारत की लिखित सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्र की ज्ञान परंपरा को संरक्षित रखने में उनकी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करती है।
 
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवाओं में अभिलेखीय एवं पांडुलिपि धरोहरों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना तथा उन्हें अभिलेखागार, शोध संस्थानों, संरक्षण प्रयोगशालाओं एवं संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध रोज़गार, शोध एवं व्यावसायिक संभावनाओं से अवगत कराना है। शिक्षकों की सहभागिता से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शैक्षणिक जगत और अभिलेखीय धरोहर संरक्षण के क्षेत्र के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करेगा।
 
संस्कृति मंत्री के मार्गदर्शन में संस्कृति विभाग का यह प्रयास राज्य की अमूल्य अभिलेखीय एवं पांडुलिपि धरोहर को संरक्षित करने तथा ज्ञान भारतम मिशन की भावना के अनुरूप भावी पीढ़ी को इससे जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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