भारत तिब्बत की गुरूभूमि है-ताशी दीकी
कुशीनगर -भारत तिब्बत की गुरूभूमि है। यह हमारे भगवान बुद्ध की जन्मभूमि है।हमारी भाषा, संस्कृति और धर्म तीनों भारत के साथ साझा संस्कृति के रूप में विकसित हुई है।तिब्बतियों के भारत सबसे बड़े आशा का केंद्र है। स्वतंत्र तिब्बत भारत के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना तिब्बतियों के लिए।वास्तव में भारत की सीमा चीन से नहीं अपितु तिब्बत से मिलती है।इसी से स्वतंत्र तिब्बत का महत्व समझा जा सकता है।तिब्बत महायान बौद्ध का प्रमुख केंद्र है।तिब्बत में हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल मानसरोवर स्थित है। चीन तिब्बत पर कब्जा करने के बाद से लगातार उसकी भाषा, धर्म, संस्कृति और जननांककीय संरचना को बदलने हेतु प्रयासरत है।उसने तिब्बत में तिब्बती भाषा की पढ़ाई बंद करवा दी है। वहां पर अपने धर्मगुरु दलाई लामा की तस्वीर रखना अपराध घोषित कर दिया गया है।
चीन वहां पर आजादी की मांग करने वाले हजारों योद्धाओं मार कर गायब कर चुका है।उपरोक्त बातें भारत तिब्बत समन्वय मंच और राष्ट्रीय सेवा योजना बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर द्वारा आयोजित गोष्ठी में भारत – तिब्बत सपोर्ट ग्रुप की समन्वयक ताशी दीकी ने मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कही।उन्होंने बताया कि चीन तिब्बत के संसाधनों का तेजी से दोहन कर रहा है।इससे वहां के पर्यावरण और जल संसाधन को बहुत क्षति पहुंची है।
इस अवसर पर विषय की प्रस्तावना भारत तिब्बत समन्वय मंच के क्षेत्रीय संयोजक डॉ शुभलाल साह ने रखी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो विनोद मोहन मिश्र ने कहा कि तिब्बत की स्वतंत्रता भारत की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। तिब्बत भारत के महायान बौद्ध शाखा की संस्कृति के संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ निगम मौर्य और आभार ज्ञापन डॉ पारस नाथ ने किया।
कार्यक्रम में भारत तिब्बत संबंध: सांझी विरासत एवं साझा भविष्य* विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के तीन श्रेष्ठ प्रतिभागियों क्रमशः अंजू कुशवाहा, विकास गुप्ता और बबली यादव को सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर डॉ सी बी सिंह, डॉ राकेश सोनकर, डॉ विवेक श्रीवास्तव, सुरेश गुप्त समेत बड़ी संख्या में छात्र -छात्राएं उपस्थित रहे।
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