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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 2 Aug 2025 6:47 PM |   597 views

बारिश क्यों नहीं होती

जब घर के आंगन में बारिश की पहली बूंद गिरती है , तब चहकती हंसी सुनाई पड़ती है, हंसी उन बच्चों की जिन्हें बरसात में जाकर छपाक करके नहाना है, फुसफुसाहट सुनाई देती है कि, आज स्कूल में रेनी डे हो जाएगा| मां की डांट खाते हुए बच्चे कि भीगे  तो बीमार पड़ जाओगे, फिर भी बच्चे भीगते हैं। इन सब का एक अलग ही जादू है मिट्टी की सोंधी खुशबू और घर के रसोई में प्याज के पकोड़े आलू के पकोड़े के लिए कढ़ाई में तेल का डाल जाना| यह सब कम होता जा रहा है क्योंकि अब बारिशे कम हो रही है ना के बराबर हो रही है।
 
बारिश कैसे होती है? इसको सरल भाषा में समझते हैं ।सूरज की गर्मी से नदियां तालाब समुद्र का पानी भाप बनकर उड़ता है यह भाप आसमान में बादल बनते हैं जब बादल भारी हो जाते हैं और ठंडक पाते हैं तो पानी की बूंद बनती है और पानी की बूंद जब जमीन पर गिरती है इसी को हम बारिश कहते हैं ।
 
बारिशे अब कम क्यों हो रही हैं? कारण
बहुत गर्मी होने से बदल बनने से पहले ही भाप का उड़ जाना।  गर्मी बहुत इसलिए पड़ती है क्योंकि पेड़ पौधे काम हो गए हैं जो कि वातावरण में नमी बनाए रखते हैं । एक वजह और है कि, क्लाइमेट चेंज और प्रदूषण की वजह से मौसम का चक्र बिगड़ गया है,, इसकी वजह से पानी के स्रोत सूख जाते हैं पानी के स्रोत सूख जाने पर किसान की फसल सूख जाती है क्योंकि सिंचाई नहीं हो पाती।
जो विद्युत पानी की वजह से बनती है यानि हाइड्रोइलेक्ट्रिक वह घट जाती है और सबसे बड़ी बात जो हम अक्सर सुनते है कि जंगलों में आग पकड़ ले रही है क्योंकि जंगल सूखते हैं और सूखी हुई लकड़ी को जल्दी आग पकड़ लेती है। यह सब पानी न बरसाने के कारण है।
 
मुझे लगता है, पानी न बरसाने से जब किसान का खेत सूख जाता है फसल खराब हो जाती है तो उसका दिल भी टूट जाता है, महंगाई की कारण उसकी कमर भी टूट जाती है। हम सब का भी मन खराब होता है ,उदास हो जाता है क्योंकि हमें गर्मी से राहत नहीं मिल रही होती और जो बारिश का इंतजार करते हैं उनका दिल मायूस हो जाता है। प्रकृति भी सुनी लगती है वह धुला-धुला सा मौसम, सब तरफ हरियाली, हरे पत्ते दिखलाई ही नहीं देते ना जंगल में मोर नाचते हैं और ना मिट्टी की सोंधी खुशबू ही आती है, इन सब के इंतजार में हमारा खुद का मन भी उदास हो जाता है।
 
क्या करें की सब कुछ अच्छा और हरा भरा हो ?
बहुत सारे पेड़ लगाए, जितने ज्यादा पेड़ उतनी ज्यादा नमी और उतनी ही संभावना बारिश की। 
जल संरक्षण भी अच्छा उपाय है और बारिश का पानी इकट्ठा करने से भूमि के अंदर जल का स्तर ठीक हो जाता है। सबसे बड़ी बात जो पेड़ लगाए हैं उनका संरक्षण भी करना है। पेड़ लगाया फोटो खींची सोशल मीडिया पर डाला और इतना करने के बाद हमारी जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती हमें लगाए हुए पेड़ों को देखना है उनका लालन पालन करना है इसको करने में बिल्कुल 5 साल लगेंगे तब जाकर वह पेड़ हरा भरा होगा और तब जाकर आपकी जिम्मेदारी पूरी होगी वृक्षारोपण की। प्रदूषण कंट्रोल करना भी महत्वपूर्ण है।
 
प्रकृति के बारे में बच्चों को बताना है बच्चों को पेड़ लगाने के फायदे बताने हैं । पहली कक्षा का छात्र अगर यह समझ जाता है तो पांचवी कक्षा दसवीं कक्षा ग्रेजुएशन तक उसने तीन पेड़ लगाकर उनको हरा भरा देख लिया। समाज के प्रति वह धीरे-धीरे साल दर साल जिम्मेदार बन गया और इस प्रकार हमारा मौसम भी संतुलित हो गया।
 
जब बारिशे नहीं होती, तो सिर्फ ज़मीन ही नहीं सूखती, घर का आँगन भी सूख जाता है।
 
छोटी बात है पर बड़ी सीख है, यदि हम पेड़ काटते हैं तो बदल रास्ता भूल जाते हैं,, जब हम पानी बचाते हैं तो बरसात हमसे खुश हो जाती है और झूम के बरसती है। तो फिर पेड़ लगाइए पानी बचाइए और बिना न्योते के बारिशों को बुलाइए।
 
-श्वेता मेहरोत्रा 
आकाशवाणी गोरखपुर।
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