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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 5 Jul 2025 7:12 PM |   620 views

योग और आधुनिक जीवन शैली

योग शब्द संस्कृत धातु के ” यु ज से बना है ,जिसका अर्थ होता है जोड़ना |इस जोड़ने को आध्यात्मिक रूप से कहा जाए तो व्यक्ति चेतना को समष्टि चेतना से मिलन कहा जाता है |अर्थात आत्मा का परमात्मा से मिलन ही योग है |

गीता में कृष्ण ने भी कहा है” योग :कर्मसु कौशलम “अर्थात अपने कार्यों को कुशलता पूर्वक करना ही योग है |मानव सभ्यता के प्रारंभ में योग का उत्थान तब हुआ जब मानव अपनी आध्यात्मिक क्षमता का ज्ञान प्राप्त कर उसे विकसित करने की विधियों की खोज करने लगा | सम्पूर्ण विश्व में ऋषि मुनियों द्वारा योग विज्ञान का क्रमिक विकास किया गया | योग के तत्व को विविध प्रतीकों ,रूपकों और अलंकारिक भाषाओँ के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया है |योग हमे एक बहुमूल्य विरासत के रूप में प्राप्त हुआ है |शारीरिक एवं मानसिक शुद्धता और प्रबलता योग की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है |सामन्जस्य एवं एकीकरण के सिद्धांतों पर आधारित होने के कारन  ही यह इतनी सशक्त एवं प्रभावकारी विधा है |

वर्तमान परिवेश में योग स्वास्थ्य रक्षा एवं पारिवारिक मंगल का साधन है | भाग दौड़ भरी जिन्दगी व् तनाव पूर्ण जीवन शैली में योग शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करता है |

योग के आठ अंग है –

1- यम 

2- नियम 

3- आसन 

4- प्राणायाम 

5 – प्रत्याहार 

6- धारणा 

7 – ध्यान 

8- समाधि 

इन योग के अंगों का पालन करके हम जीवन को उन्न्त बना सकतें हैं तथा मानव जीवन के अंतिम लक्ष्य मोक्ष को प्राप्त कर सकते हैं |

–मनीष योग प्रशिक्षक ,नई दिल्ली 

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