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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 10 May 2025 5:13 PM |   293 views

गौ -आश्रय स्थलों में नेपियर घास की खेती शुरू

 
गोंडा-जनपद गोंडा में गौ -आश्रय स्थलों के संचालन और वहां रह रहे निराश्रित मवेशियों के पोषण हेतु एक नई पहल ने सकारात्मक रूप लेना शुरू कर दिया है। मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के माध्यम से पशुपालन विभाग ने हरा चारा उत्पादन का कार्य शुरू किया है, जिसके तहत नेपियर घास की खेती की जा रही है।
 
नेपियर घास एक बहुवर्षीय बारहमासी घास है, जिसे कम पानी और कम पोषक तत्वों में भी आसानी से उगाया जा सकता है। यह घास प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है और मवेशियों के लिए एक संतुलित आहार प्रदान करती है। पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने और उनके वजन में वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए यह अत्यंत उपयोगी साबित हो रही है।
 
तेजी से बढ़ने वाली यह घास पूरे वर्ष हरा चारा उपलब्ध कराने में सक्षम है, जिससे यह पशुपालकों और गोशालाओं के लिए एक लागत प्रभावी विकल्प बनती है। गोंडा जनपद में इस नवाचार को जमीन पर उतारते हुए अब तक 09 गो-आश्रय स्थलों पर इसकी सफल रोपाई की जा चुकी है।
 
इनमें, झंझरी के चकसड़, पण्डरीकृपाल के खम्हरिया हरवंश, रूपईडीह के पिपरा बाजार, मुजेहना के रूद्रगढ़ नौसी, हलधरमऊ के मैजापुर, कटरा बाजार के नदावा, परसपुर के नरायनपुर मर्दन, बभनजोत के घरघाट तथा मनकापुर के तामापार स्थित गौशालाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 21 अन्य स्थलों पर कार्य प्रगति पर है।
 
जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने बताया कि, “यह योजना न सिर्फ निराश्रित मवेशियों के लिए पोषण सुनिश्चित कर रही है, बल्कि स्थानीय लोगों को मनरेगा के तहत रोजगार भी दे रही है।” आने वाले महीनों में जिले की अधिकांश गौशालाओं को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
 
यह पहल गोंडा जिले को आत्मनिर्भर गौ-आश्रय व्यवस्था की ओर ले जाती दिख रही है, जो न केवल मवेशियों की देखभाल में सहायक है, बल्कि ग्रामीण विकास और सतत कृषि को भी प्रोत्साहित करती है।
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