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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 3 May 2025 6:37 PM |   989 views

अनाज भंडारण की वैज्ञानिक विधि अपनाए किसान भाई

देवरिया -रबी फसलों की कटाई समाप्ति की ओर है, कटाई माड़ाई  के बाद सबसे जरूरी काम  अनाज का भंडारण होता है। अनाज के सुरक्षित भंडारण के लिए वैज्ञानिक विधि अपनाने की जरूरत होतीहै।

सेवानिवृत्ति वरिष्ठ कृषि कीट वैज्ञानिक प्रो.रवि प्रकाश मौर्य  निदेशक प्रसार्ड ट्रस्ट मल्हनी भाटपार रानी देवरिया ने बताया कि भंडारण की सही जानकारी न होने से 10 से 15 प्रतिशत तक अनाज नमी, दीमक, घुन, बैक्टीरिया द्वारा नष्ट हो जाता है। अनाज को सुरक्षित रखने के लिए गोदाम की सफाई कर पुराने अवशेष आदि को बाहर निकाल कर जलाकर नष्ट कर देना चाहिए। दीवारों, फर्श एवं जमीन आदि में यदि दरार हो तो उन्हें सीमेंट, कंक्रीट से बंद कर दें । टूटी दीवारों  की मरम्मत कर दें।

अनाजों को अच्छी तरह से साफ सुथरा कर धूप में सुखा लेना चाहिए, जिससे कि दानों में 10 प्रतिशत से अधिक नमी न रहने पाये। अनाज में ज्यादा नमी रहने से फफूंद एवं कीटों का आक्रमण अधिक होता है ।अनाज को सुखाने के बाद दांत से तोड़ने पर कट की आवाज करें तो समझना चाहिए कि अनाज भंडारण के लायक सूख गया है तेज धूप से गर्म अनाज को  ठंडा हो जाने के बाद ही भंडार गृह  में रखना चाहिए।

अनाज से भरे बोरे को भंडार गृह  में रखने के लिए फर्श से 20 से 25 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर बांस या लकड़ी के तख्ते  का मंच तैयार करना चाहिए जो दीवार से कम से कम 75 सेंटीमीटर की दूरी पर हो ,बोरियों के छल्लियों के बीच भी 75 सेंटीमीटर खाली स्थान रखना फायदेमंद होता है ।अन्न का भंडारण करते समय हवा के रूख को अवश्य ध्यान में रखें अगर पूरवा हवा चल रही हो तब अन्न का भंडारण न करें ।पछुआ हवा के समय भंडारण करना उचित होता है।

अनाज में नीम की पत्तियों का प्रयोग करते समय नीम पत्ती सुखी होनी चाहिए ।इसके लिए नीम पत्ती को भंडारण से 15 दिन पहले किसी छायादार स्थान पर कागज पर रखकर सुखा लें ,उसके बाद अनाज  की बोरी या बखार में 2 किलोग्राम नीम की सुखी पत्तियों को  प्रति क्विंटल अनाज की दर से रखें। अनाज भंडारण के कुछ पारंपरिक तरीके हैं जिससे भी किसान भाई अपना सकते हैं जैसे दलहन में कड़ुआ तेल (सरसों  का तेल) ,मूंगफली, तेल या सोयाबीन तेल 5 मिली प्रति किलोग्राम की दर से मिला कर रखना चाहिए ।

तेल  कीटों के अंडो की प्रक्रिया को बाधित करते है  तथा अंडे  दानों  से चिपक नहीं पाते है ,जिससे दाने कीट मुक्त रह जाते है।  गेहूं में नीम ,लहसुन और करंज के पत्ते कोठी में बिछाना सूखे हुए लहसुन के डंठल रखना आदि है।

भंडारण में पुराना अनाज एवं भूसा आदि  को निकाल कर एक महीने पहले सफाई कर चूहों द्वारा किए गए छेद ,अन्य टूट फूट की मरम्मत कर नीम की पत्तियों  का प्रधुमन करके अच्छी तरह से भंडारों को बंद कर दें, जिसमें छुपे हुए   कीट नष्ट हो जाए । बोरी को खौलते हुए  नीम की पत्तियों  वाले पानी में शोधित कर अच्छी तरह से सुखा लें। इस प्रकार सही तकनीक अपनाने से आनाज सुरक्षित रहेगा।

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