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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 2 Feb 2025 6:08 PM |   692 views

अतरंगी टेराकोटा आभूषण कलाकारी का सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का हुआ शुभारम्भ

गोरखपुर-राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर (संस्कृति विभाग, उ0प्र0) द्वारा अतरंगी टेराकोटा आभूषण कलाकारी का सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला (दिनांक 02 से 08 फरवरी, 2025) का शुभारम्भ संग्रहालय के प्रदर्शनी कक्ष में दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया।

उक्त कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ0 प्रियंका श्रीवास्तव, असिस्टेन्ट प्रोफेसर महात्मा गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखपुर एवं अध्यक्ष रोटरी क्लब आफ गोरखपुर युगल (2024-25) तथा विशिष्ट अतिथि उषा अग्रवाल अन्तर्राष्ट्रीय इनरव्हील संस्था की पूर्व चेयरमैन एवं समाज और नारी शिक्षा के प्रति जागरूक कार्यकर्ता सहित कार्यशाला की मुख्य प्रशिक्षक दीपिका सिंह, सहायक प्रशिक्षिका रितु अग्रहरी, अल्का सिंह, सरोज पाल, रिंकी गौतम उपस्थित रहीं। उक्त कार्यशाला में कुल 82 लोगों द्वारा प्रतिभाग किया गया है।

उक्त अवसर पर मुख्य अतिथि डाॅ0 प्रियंका श्रीवास्तव, असिस्टेन्ट प्रोफेसर ने अपने सम्बोधन में कहा कि संग्रहालय द्वारा प्राचीन ऐतिहासिक मृण्मूर्तियों से प्रेरित टेराकोटा कला के क्षेत्र में गोरखपुर शहर के लोगों को उक्त प्रशिक्षण के माध्यम से प्रशिक्षित करके व्यवसायिक कला को प्रोत्साहिक करना अत्यन्त हर्ष एवं गौरव की बात है। मैं इस कार्यशाला के आखिरी दिन की प्रदर्शनी देखने के लिए 08 फरवरी, 2025 को अवश्य आऊंगी। हमारे पूर्वजों ने जो टेराकोटा कला को सहेज कर रखा था, उसे आज संग्रहालय के उप निदेशक डाॅ0 यशवन्त सिंह राठौर द्वारा मूर्त रूप देने का प्रयास अत्यन्त ही सराहनीय पहल है। टेराकोटा के माध्यम से आज गोरखपुर का नाम विदेशों तक जा रहा है। इस कला को आगे बढ़ाने में हम सभी को योगदान देना चाहिए। हम लोगों के साथ डाॅ0 यशवन्त का हाथ है और साथ है।

विशिष्ट अतिथि उषा अग्रवाल द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि बौद्ध संग्रहालय के माध्यम से कला प्रतिभा को निरन्तर गढ़ा जा रहा है। जो विभिन्न क्षेत्रों में रचनात्मक कार्यशाला/गतिविधियों का निरन्तर आयोजन करके बौद्ध संग्रहालय का कीर्तिमान पूरे प्रदेश में उत्तरोत्तर स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए मैं इन्हें बधाई देता हूॅं। भारतीय संस्कृति एवं कला को वर्तमान परिवेश में वर्तमान युवा पीढ़ी को संग्रहालय से जोड़कर उन्हें भारत की प्राचीन गौरवशाली इतिहास, कला एवं संस्कृति से परिचित कराना का यह अद्भूत प्रयास है।  

संग्रहालय के उप निदेशक, डाॅ0 यशवन्त सिंह राठौर ने कहा कि संग्रहालय में प्रथम बार अतरंगी टेराकोटा आभूषण कलाकारी की सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया है।

कार्यशाला में प्रयास किया जा रहा है कि सभी प्रतिभागी इस अद्भूत टेराकोटा आभूषण कलाकारी से परिचित हो सकें तथा इसकी अनुभूति स्वयं कर सकें। टेराकोटा कला मानव इतिइास की प्राचीनतम कलाओं में से एक है। कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों को टेराकोटा कलाकृतियों को बनाने से लेकर, पकाने एवं रंगने आदि की तकनीकी से परिचित कराया जाएगा।

 08 फरवरी, 2025 को इस कार्यशाला में सृजित टेराकोटा आभूषणों की प्रदर्शनी का आयोजन सभी के अवलोकनार्थ किया जाएगा। कार्यशाला के 05 उत्कृष्ट चयनित प्रतिभागियों को प्रदर्शनी के दिन सम्मानित करने के साथ अन्य चयनित प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जायेगा। मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि को संग्रहालय की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

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