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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 24 Oct 2024 5:55 PM |   633 views

‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ विषय पर दो दिवसीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया

कुशीनगर -बीएड विभाग बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर द्वारा ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ विषय पर दो दिवसीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का शुभारंभ भंते चंद्रमणि सभागार में किया गया।इसमें कुशीनगर जनपद के एक दर्जन शिक्षण संस्थानों के छात्र/छात्राए प्रतिभाग कर रहे हैं।
 
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि विधायक फाजिलनगर सुरेन्द्र कुशवाहा ने बोलते हुए कहा कि ‘ एक राष्ट्र एक चुनाव’ देश का सबसे ज्वलंत मुद्दा है।इस विषय पर देश में खासकर युवाओं के बीच पर्याप्त चर्चा होनी चाहिए।विश्व के अनेक देशों में राष्ट्रपति प्रणाली की व्यवस्था है। भारत में भी 1967 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे।
 
आज स्थिति यह हो गई है कि प्रत्येक माह देश के किसी न किसी कोने में चुनाव होते ही रहते हैं। चुनाव के कारण आचार संहिता लागू होने से अधिकांश समय तक सरकार निर्णय लेने की स्थिति में नहीं रहती फलतः सरकार का कार्य प्रभावित होता है।इससे देश के विकास की गति धीमी होती है। बार बार होने वाले चुनाव में बड़े पैमाने पर धन एवम् सरकारी कर्मचारियों का इस्तेमाल होता है।अगर चुनाव एक साथ होंगे तो जन शक्ति और धन की बर्बादी को रोका जा सकता है। एक राष्ट्र एक चुनाव के समर्थक और विरोधी दोनो तरह के लोग हैं। अतः इस पर व्यापक विचार विमर्श के पश्चात ही आगे बढ़ना चाहिए।
 
विशिष्ट अतिथि डॉ त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने एक राष्ट्र एक चुनाव को देश की आवश्यकता बताया।
 
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य प्रो. विनोद मोहन मिश्र ने बताया कि एक साथ चुनाव कराने से समय और धन की बर्बादी रुकेगी लेकिन अल्पमत सरकार की स्थिति में केंद्र सरकार को अप्रत्यक्ष रूप से राज्य की सरकार चलाने का अवसर मिलेगा।इससे नई तरह की समस्याएं सामने आएंगी।जनता की शक्ति क्षीण होगी। अतः इस पर व्यापक विचार विमर्श की आवश्यकता है।
 
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके हुई।उपस्थित अतिथियों का परिचय एवम् स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो विभ्राट चंद कौशिक ने किया।
 
निर्णायक मंडल के सदस्य प्रो गौरव तिवारी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि भारत ईसा पूर्व से ही लोकतान्त्रिक समाज रहा है।एक साथ चुनाव कराने के कारण संविधान में संशोधन करना पड़ेगा और अक्षम सरकार को हटाकर नई सरकार चुनने का जनता का अधिकार समाप्त हो जायेगा। अतः ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि एक साथ चुनाव होने की स्थिति में जनता के अधिकार सीमित न हो जाए।
 
कार्यक्रम का संचालन डॉ कृष्ण कुमार जायसवाल ने किया।आज अमन कुशवाहा, प्रियांशी मिश्रा और निक्की यादव समेत कुल 34 प्रतिभागियों ने अपने विचार व्यक्त किया। विजेताओं की घोषणा और पुरस्कार वितरण कल 25 अक्टूबर 2024 को 12 बजे से समापन सत्र में की जायेगी।
 
वाद-विवाद प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के दूसरे सदस्य प्रो हरिशंकर पाण्डेय और प्रो महबूब आलम रहे।
 
इस अवसर पर  डॉ निगम मौर्य, डॉ दुर्ग विजय पाल सिंह, डॉ विवेक श्रीवास्तव, डॉ इंद्रासन प्रसाद, डॉ अनुज कुमार समेत बड़ी संख्या में आचार्य और छात्र/छात्राएं उपस्थित रहे।
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