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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 30 Jul 2024 5:31 PM |   553 views

केले की फसल में है 2 से 4 गुणा लाभ- जितेंद्र कुशवाहा

कुशीनगर-आज ग्राम फुलवापट्टी (कुड़वा दिलीप नगर) में केला कृषकों के साथ केले के फसल के वृहद उत्पादन और उद्योग के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से केले के ए.सी.राइपनिंग प्लांट्स तथा लगभग 100 एकड़ में लगाए गए केले की फसलों का स्थलीय निरीक्षण जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने मुख्य विकास अधिकारी गुंजन द्विवेदी के साथ किया।
 
 निरीक्षण दौरान जिलाधिकारी ने कृषक जितेंद्र कुशवाहा से संवाद कर पूरे ग्राम सभा में लगाए जाने केले की फसलों, उसके उत्पादन के दौरान आने वाली विविध समस्याओं ,फसल की लागत के सापेक्ष प्राप्त लाभ, केले के ए.सी. राइपनिंग चैंबर्स में केले के पकाने की विधि एवं उसके पकाने के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्रियों, सिंचाई के संसाधनों , मार्केटिंग बिजनेस प्लान के बारे में जानकारी ली। कृषक जितेंद्र कुमार कुशवाहा ने लॉकडाउन के बाद शुरू किए गए केले के फसल और फसल उत्पादन के दौरान अप्रत्याशित लाभों के बारे में भी जिलाधिकारी को विस्तार से बताया।
 
कुशवाहा ने बताया की केले के फसल में लागत के सापेक्ष बाजार दरों के अनुकूल लगभग 2 से 4 गुना लाभ हो जाता है, 7 बीघा से खेती बढ़ाते हुए लीज पर भूमि लेकर  लगभग 20 एकड़ में केले की खेती की, जिससे लागत के सापेक्ष समय – समय पर लाभ हुआ। ग्राम सभा में सिंचाई और विद्युत की प्रमुख समस्या है, अगर इसका निराकरण हो तो लाभ में सभी कृषकों की अप्रत्याशित वृद्धि होगी, जिसपर जिलाधिकारी ने तत्काल विद्युत कनेक्शन हेतु लंबित आवेदनों को निस्तारित करते हुए शीघ्र कनेक्शन देने एवं जनपद में ट्यूबवेल, पंपिंग सेट आने के पश्चात शीघ्र लगाने के निर्देश संबंधित अधिकारी को दिए। 
 
मार्केटिंग बिजनेस प्लान के बारे में बताते हुए कृषक ने कहा की यहां से केले को यहां के स्थानीय 4 बाजारों हाटा, फाजिलनगर आदि क्षेत्रों में विक्रय किया जाता है। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया की केले के तने से यहां रेशे भी बनाए जाते है, स्वयं सहायता समूह को महिलाओं को ओ.डी.ओ.पी. के तहत इसके लिए विशेष टूलकीट भी उद्योग विभाग द्वारा प्रदान किए गए है। साथ ही जनपद में केले की खेती के क्षेत्रफल जोकि लगभग 15,000 हेक्टेयर में होती है, पर आय-व्यय, प्रति हेक्टेयर केले की खेती पर 30,738 रुपया दी जाने वाली सब्सिडी एवं केले पकाने के राइपेनिंग चैम्बर जिस पर प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत 35 पर्सेंट की सब्सिडी विभाग द्वारा दी जाती है, के बारे में भी कृषकों को बताया। 
 
 जिलाधिकारी ने केले के उप-उत्पादों यथा अचार, आटा, कपड़े , सैनिटरी पैड्स, गहने, चिप्स आदि के बारे कार्यशाला आयोजित कर कृषकों को प्रशिक्षित करने एवं हल्दी प्रोसेसिंग यूनिट की भांति सी.एफ.सी. की प्रपोजल बनाकर प्रस्ताव शासन को भेजने व साथ ही प्रगतिशील कृषकों को समय-समय पर समानित करने के निर्देश भी डीएचओ को दिए।जिलाधिकारी द्वारा केले की अच्छी पैदावार करने वालों कृषकों की प्रशंसा करते हुए कहा की कुशीनगर जनपद में केले से बने उप उत्पादों को बढ़ावा देना है।
 
वैश्विक पटल पर केले के उत्पादों को मार्केटिंग बिजनेस प्लान के तहत पूरा प्लान डेवलप कर कार्य करें। बिजनेस प्लान की सख्त आवश्यकता है। विस्तृत प्लान तैयार कर प्राकृतिक खाद का उपयोग करते हुए हम गुणवत्ता युक्त प्रत्येक केले के उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाते हुए उद्योग के रूप में विकास कर सकते है। उन्होंने कहा की केले की खेती व कृषि को उद्योग के रूप में विकसित कर किसानों को प्रगतिशील बनाना हमारा मुख्य उद्देश्य है।
 
उन्होंने कहा कि नवीन कृषि तकनीकियों का उपयोग कर केले तथा अन्य कृषि उत्पादों को उद्योग के रूप में विकसित करने के साथ साथ ODOP के अंतर्गत कुशीनगर में उत्पादन किए जाने वाले विभिन्न फसलों का , केले के विशिष्ट उत्पादों आटा , रेशे, आचार, कपड़े आदि हल्दी के उत्पादन तथा औषधीय फसलों के साथ-साथ हल्दी, ड्रैगन फ्रूट आदि को बढ़ावा देना है जिससे कि बाहर भी उनका निर्यात किया जा सके। अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर उत्पादन को बढ़ावा देना है जिससे कि यहां के किसान अधिक से अधिक लाभान्वित हो सके, उनकी आय में वृद्धि हो सके तथा बाहर भी अपने उत्पादों का विक्रय कर सके। 
 
निरीक्षण दौरान मुख्य विकास अधिकारी गुंजन द्विवेदी, जिला उद्यान अधिकारी कृष्ण कुमार और उद्यान निरीक्षक तथा अन्य जनपद स्तरीय अधिकारी कर्मचारी एवं ग्राम सभा के सम्मानित कृषक उपस्थित थे।
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