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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 10 May 2024 4:13 PM |   1049 views

मानसून पूर्व बरसात के बाद हल्दी की बुवाई करें : डॉ रजनीश

हल्दी एक मसाले वाली महत्वपूर्ण नगदी फसल है। जनपद के कुछ विकास खंडों में हल्दी की खेती घरेलू एवं व्यापारिक स्तर पर की जाती है। इसकी उन्नत खेती के बारे में चर्चा करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र देवरिया के उद्यान विशेषज्ञ डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि हल्दी के लिए नम जलवायु,  बुवाई तथा जमाव के समय कम वर्षा एवं पौधों की बढ़वार के समय अधिक वर्षा तथा फसल पकने के समय पूर्व शुष्क वातावरण की आवश्यकता होती है।

बलुई दोमट या मटियार दोमट भूमि जिसमें जल निकास की उचित व्यवस्था हो को अच्छे ढंग से तैयार करनी चाहिए। मिट्टी जितनी भुरभुरी होगी गांठ उतनी अच्छी बनेगी। बुवाई के लिए अच्छी प्रजाति का चुनाव करना चाहिए। बुआई के 1 माह पहले गोबर की खाद की पूरी मात्रा को खेत में बिखेरकर जुताई करना चाहिए। तत्पश्चात अंतिम जुताई के समय नत्रजन की पूरी मात्रा एवं फास्फोरस और पोटाश की  आधी मात्रा खेत में मिला देनी चाहिए।

नाइट्रोजन की शेष मात्रा को तीन भागों में बांटकर बुवाई के 30, 60 और 90 दिनों बाद खड़ी फसल में देना चाहिए। जहां तक हो सके हल्दी की बुवाई 40 से 45 सेंटीमीटर की दूरी पर मेड बनाकर 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी पर करना चाहिए। बुवाई के पहले प्रकंदो को कार्बन डाइऑक्साइड की एक ग्राम मात्रा पर लीटर पानी के घोल करके  25 से 30 मिनट तक उपचारित करके लगाना चाहिए।

बरसात के बाद 20 दिनों के अंतर पर सिंचाई करते रहना चाहिए। खुदाई के एक माह पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए। खेत को खरपतवार से मुक्त रखना आवश्यक है। बरसात के बाद गुड़ाई करके मिट्टी चढ़ानी चाहिए।  इससे प्रकंदो का विकास अच्छा होता है। जून में बुवाई की गई फसल फरवरी में खुदाई योग्य हो जाती है। इस समय पत्तियां पीली पड़ जाती है और प्रकंद पूर्ण विकसित हो जाते हैं।

उन्नतशील प्रजातियां –
मेघा १, स्वर्णा, नरेंद्र हल्दी १, नरेंद्र हल्दी २, राजेंद्र सोनिया, पडरौना लोकल आदि |
 
खाद एवम उर्वरक/ हेक्टेयर
गोबर की खाद: 20-25 टन 
नत्रजन: 120-150 किग्रा
फास्फोरस: 60-80 किग्रा
पोटाश: 100-120 किग्रा
जिंक सल्फेट: 20-25 किग्रा
बीज की मात्रा
 30-35 ग्राम के प्रकंद 
20-25 कुंतल प्रति हेक्टेयर
 
प्रमुख कीट एवम नियंत्रण
थ्रिप्स- यह बहुत छोटे लाल, काले या उजले रंग के कीट होते हैं जो पत्तियों से रस चूसते हैं। जिससे पत्तियां मुड़कर नाली नुमा हो जाती हैं। इन कीटों का प्रकोप होने पर थाईमेथाकजाम नाम की दवा की चार मिलीलीटर दवा 10 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
 
प्रमुख रोग एवम नियंत्रण
प्रकंद विगलन: जमीन के अंदर प्रकंद सड़ने लगता है। बुआई से पहले बीज को उपचारित करना चाहिए।
 
पत्ती धब्बा रोग: पत्तियों पर छोटे-बड़े धब्बे बन जाते हैं, जिससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है। इससे बचाव के लिए धब्बे दिखाई  पढ़ने के साथ ही साथ डाएथेंन एम 45 की 2 ग्राम तथा काकार्बेंडाजिम की 1 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
 
उपज-
250-300 क्विंटल कच्ची हल्दी प्रति हेक्टेयर
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