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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 23 Aug 2023 5:37 PM |   409 views

आठवीं पास महिला कर रही हैं आठ लाख रुपये सालाना का मत्स्यपालन

देवरिया-जनपद में मछली पालन उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा है। कई प्रगतिशील किसान मछली पालन के जरिये अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। री-सर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) से मत्स्यपालन किसानों के लिए खुशहाली की राह खोल रहा है।
 
विकासखंड रामपुर कारखाना के गांव बरियारपुर टोला- जेठहसी निवासी आठवीं पास मनभावती देवी ने आरएएस सिस्टम से मत्स्यपालन कर दो वर्ष के भीतर ही अपनी आय दोगुनी से अधिक कर ली है। उन्होंने वर्ष 2020-21 में 10×10 वर्ग मीटर की छोटी सी भूमि पर आरएएस सिस्टम आधारित पंगेसियस एवं तिलैपिया प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया।परियोजना की लागत 7 लाख रुपये आयी, जिसमें से 4.50 लाख रुपये अनुदान के रूप में मिले।
 
मत्स्यपालन शुरू करने के एक वर्ष के भीतर ही परियोजना की लागत प्राप्त हो गई और दूसरे वर्ष से आठ लाख रुपये वार्षिक की आय प्रारंभ हो गई। बढ़ी आय से उनके सामाजिक स्तर में सुधार हुआ और क्रय शक्ति में वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रगतिशील किसान एवं मत्स्यपालक आरएएस सिस्टम स्थापित करना चाहता है तो विकास भवन स्थित उनके कार्यालय में संपर्क कर सकता है।
 
मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण नंदकिशोर प्रसाद ने बताया कि री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम में खुले तालाब में मछली पालन के स्थान पर इंडोर अथवा आउटडोर सीमेंटेड पांड में किया जाता है। इस सिस्टम में टेम्परेचर कंट्रोलर लगा होता है, जो स्वतः तालाब का तापमान नियंत्रित करता है।
 
इस तालाब में मैकेनिकल बायोफिल्टर का प्रयोग करके पानी का पुनर्चक्रीकरण किया जाता है, जिससे कई साल तक पानी बदलने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रगतिशील किसान एवं मत्स्यपालक आरएएस सिस्टम स्थापित करना चाहता है तो विकास भवन स्थित उनके कार्यालय में संपर्क कर सकता है।
 
जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि जनपद में मछलीपालन की असीम संभावना मौजूद हैं। आरएएस सिस्टम तथा बायोफ्लॉक आधारित मत्स्यपालन जनपद की आर्थिक तस्वीर बदलने का सामर्थ्य रखती हैं। इसके लिए निरंतर प्रगतिशील किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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