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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 15 Sep 2018 10:46 AM |   2504 views

योगिराज देवरहा बाबा

                                   (नेहा मौर्य )

बीसवी सदी   मे पूरे भारत मे चर्चित सिद्ध पुरुष योगिराज देवरहा बाबा को कौन नहीं जानता है| उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद के सुदूर दक्षिण अंचल मे जनपद मुख्यालय से ३३  किलोमीटर दूर मइल नाम का एक कस्बा है , वहां से कुछ दूर दक्षिण ‘नरियाव ‘ नामक ग्राम के पास ही सरयू (घाघरा )नदी बहती है |वहाँ पर स्थित देवरहाबाबा कीस्मृति स्थ्ली बाबा के अतीत की गाथा गा रही है|

बाबा का जन्म कब और कहाँ हुआ था  इसके बारे मे आज तक कोई नही बता सका  मथुरा ,अयोध्या और प्रयाग मे उनके आश्रम मे आज भी तमाम् संत महात्मा योग साधना मे लगे रहते है |सरयू नदी मे एक घास ,फुंस ,सरकंडे का मचान बना था ,जो उनके शिष्यों द्वारा बनाया गया था |बाबा उसी मचान के उपर जन मानस को दर्शन देते थे ,तथा दर्शन देने के बाद वे कहां जाते थे ,कहां रहते थे ,किसी को पता नही चल पाता  था |प्रत्यक्षदर्शियो के अनुसार उनको जल समाधि की सिद्धि  प्राप्त थी |क्योंकि जब वे सरयू नदी मे स्नान करने नीचे उतरते थे ,तो घंटो पानी मे डूबकी लगाकर अन्दर रहते थे |पानी मे डूबकर दो – चार मिनट श्वास रोकना कठिन है ,जबकि ये घंटो जल मे समाधि लगाते थे | जब माघ के महीने मे प्रयाग मे माघ मेला या कुम्भ मेला लगता था तो जिस दिन सायंकाल तक लोग यहाँ पर इनका दर्शन करते थे ,उसके अगले दिन ब्रह्म वेला मे ये प्रयाग मे दर्शन देने लगते थे |ये कब गये ,कैसे गये यह किसी को पता नही चल पता था |हर जगह इनका मंच पानी मे ही रहता था |चाहे वह इलाहाबाद का संगम हो ,चाहे वृंदावन मे यमुना नदी हो , या नरीयांव मे घाघरा नदी |इससे स्पष्ट होता है कि देवरहा बाबा को जल समाधि की  सिद्धि प्राप्त थी | 

देवरहा बाबा की आयु के सम्बंध मे किसी को कुछ नही पता है |भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि मै तीन वर्ष की अवस्था मे अपनी माँ के साथ देवरहा बाबा का दर्शन करने जाया करता था और उनकी माँ बताती थी ,कि उस समय भी देवरहा बाबा वृद्ध थे |डाक्टर राजेंद्र प्रसाद का जन्म सन १८८४ मे हुआ था |अत: देवरहा बाबा १८८७ मे भी इसी तरह से थे | ब्रिटिश गवर्नर जोर्ज पंचम ने अपनी भारत गाथा मे लिखा है कि सन १९११ मे जब वह भारत आया था ,तो वह देवरहा बाबा का दर्शन करने गया था |

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु , कमलापति त्रिपाठी , लालबहादुर शास्त्री , सरदार बल्लभ भाई पटेल ,इंदिरा गाँधी , राजीव गाँधी ,संजय गाँधी ,अटल बिहारी वाजपई ने इनका दर्शन किया था |सन १९७७ मे आपात काल के बाद जब इंदिरा गाँधी चुनाव हारी थी , तो बाबा का दर्शन करने आई थी और बाबा ने हाथका पंजा  उठाकर  उन्हें आशीर्वाद दिया था |कांची कोटि के पीठाधीश्वर शंकराचार्य ने इंदिरा गाँधी को इसी पंजा को अपना चुनाव निशान बनाने का परामर्श दिया तत्पश्चात इंदिरा गाँधी ने अपना चुनाव चिन्ह गाय बछड़ा से बदलकर हाथ का पंजा कर दिया और १९७९ की मध्यावधि चुनाव मे वह बहुमत   से विजयी हुई | तब से वह बराबर बाबा का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने आती थी |

संत देवरहा बाबा ने कभी अपने चमत्कारों का प्रदर्शन नही किया |वह जानवरों से बाते करते थे ,तथा उनके आश्रम के पशु उनकी बात मानते थे , उनका इशारा समझते थे |उनका गौ से अनन्य प्रेम था |आज भी उनके आश्रम पर एक बहुत बड़ी गौशाला है जिसमे हजारो की संख्या मे गाये रहती है , आश्रम का एक बहुत बड़ा चारागाह भी है |बाबा पेड़ -पौधों से भी बाते करते थे ,उनके आश्रम मे बबूल के पेड़ ज्यादा है , उन बबूल के पेड़ो मे कांटे नही होते है ,तथा उससे सुगंध आती थी |

बाबा भगवान राम के भक्त थे ,उनके मुख से सदैव राम राम ही निकला करता था ,लोगो को भी राम नाम लेने की प्रेरणा दिया करते थे |सन १९८९ मे प्रयाग के कुम्भ मेले मे विश्व हिन्दू परिषद् के मंच से उन्होंने कहा था कि ‘जब तक गौ रक्षा नही होगी तब तक राष्ट्र कल्याण संभव नही है |प्रतिदिन लाखो भक्त उनका दर्शन करने आया करते थे ,वे उन भक्तो से बाते करते थे ,तथा लोगो के मस्तक पर पैर रखकर आशीर्वाद देते थे |एक बार देवरिया मे भयंकर सुखा पड़ा था |कई गांवो से लोग उनके पास पहुचे तब बाबा ने कहा वर्षा होगी ,फिर बहुत पानी बरसा |उनके मचान पर कोई सामान नही रहता था ,लेकिन जब कोई भक्त उनसे प्रसाद मांगता था ,तो उसी मचान से पता नही कहा से फल और बताशे देते थे |

११जून १९९० को योगिनी एकादशी के दिन वृंदावन मे उनके मचान के चारो तरफ यमुना की लहरे हिलोरे मार रही थी ,उस समय उस अनंत विभूषित योगिराज देवरहा बाबा का देहावसान हो गया |आज भी उनकी तपोभूमि ‘नरियाव ‘मे तथा मथुरा के वृंदावन एवं प्रयाग मे उनके स्थानों पर काफी लोग उनके दर्शन करने आते है |   

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