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By : Nishpaksh Pratinidhi | Published Date : 10 Feb 2026 7:31 PM |   27 views

अन्तरिक्ष में मानव विषयक एक दिवसीय कार्यशाला सह प्रतियोगिता सम्पन्न

गोरखपुर-राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर, संस्कृति विभाग, उ0प्र0 एवं सुष्मिता सिंह बक्की, स्पेस आर्टिस्ट, उ0प्र0 के संयुक्त तत्वावधान में आज अन्तरिक्ष में मानव विषयक एक दिवसीय कार्यशाला सह प्रतियोगिता सम्पन्न हुई।
 
उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डाॅ0 हाशिमा हसन, नासा साइन्टिस्ट (भारतीय मूल) रहीं। विशिष्ट अतिथि खगोलविद् अमर पाल सिंह, नक्षत्रशाला (तारामण्डल), गोरखपुर भी उपस्थित रहें।
 
उक्त कार्यक्रम में तीन विद्यालयों-सरमाउण्ट इण्टरनेशनल स्कूल, गौतम बुद्धा एकेडमी तथा एन0पी0ए0 एकेडमी, गोरखपुर के कुल 80 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। जिसमें से सफल प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि के हाथों प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय सहित दो सान्त्वना पुरस्कार/प्रतीक चिन्ह एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।
 
इसके अतिरिक्त प्रतियोगिता में अच्छा प्रयास करने वाले 38 छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया गया। प्रथम पुरस्कार अनुष्का यादव, द्वितीय पुरस्कार रितिका मार्य, एन0पी0ए0 एकेडमी तथा तृतीय एवं सान्त्वना पुरस्कार सरमाउण्ट इण्टरनेशनल स्कूल के अश्विन पाण्डेय व आदित्य त्रिपाठी को प्राप्त हुआ। दूसरा सान्त्वना पुरस्कार गौतम बुद्ध एकेडमी दिव्यनगर, खोराबार के कुमार चैतन्य को प्राप्त हुआ।
 
कार्यक्रम संयोजक एवं स्पेस आर्टिस्ट सुष्मिता सिंह बक्की ने कहा कि मुख्य अतिथि नासा साइन्टिस्ट डाॅ0 हाशिमा हसन, नासा के स्पेस सेन्टर से चलकर 09 फरवरी, 2026 को सीधे गोरखपुर पहुॅंची और आज बौद्ध संग्रहालय द्वारा आयोजित उक्त कार्यक्रम सम्मिलित हुईं। जोकि हम सबके लिए बड़े ही सौभाग्य की बात है। बक्की ने कार्यक्रम एवं मुख्य अतिथि का सक्षिप्त परिचय एवं रूप-रेखा भी प्रस्तुत किया।
 
उक्त अवसर पर मुख्य अतिथि डाॅ0 हाशिमा हसन, नासा साइन्टिस्ट ने जीवन संघर्षों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि मैनें जिस दौर में पढ़ाई की, जिसमें लड़कियों को घर से बाहर निकलना मुश्किल था। फिर भी मैंने अपने सपनों को साकार करने के लिए निरन्तर प्रयासरत रही एवं अपने सपनों को हमेशा अपने अन्दर जीवन्त रखा। आज जो कुछ भी है, मेरे हिम्मत और लगन तथा आत्मविश्वास का ही परिणाम है। इसलिए आज की विद्यार्थियों एवं युवा पीढ़ी को यह संदेश है कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए कभी हौसले को कम न होने दें। आपको अपनी मंजिल अवश्य मिलेगी। हमेशा सकारात्मक प्रयास करें। असफलताओं से घबराये नहीं। 
 
कार्यक्रम संयोजक सुष्मिता सिंह बक्की की योग्यता एक कंप्युटर साइंस इंजीनियर हैं। जबकि इनका मुख्य रूचि स्पेस आर्ट में होने के कारण एक स्पेस आर्टिस्ट हैं। जो भारत के उत्तर प्रदेश के खलीलाबाद, संतकबीर नगर से हैं। इनके द्वारा बनाई गई स्पेस आर्ट ‘‘इसरो‘‘ में भी प्रदर्शित है सुष्मिता पिछले सात सालों से एक स्पेस आर्टिस्ट के तौर पर सक्रिय हैं। इस बार सुष्मिता एक ऐसी रोचक सीरीज पर काम कर रही हैं जो अंतरिक्ष में भारत के योगदान को दुनिया के सामने रखता है। 
 
सुष्मिता सिंह बक्की द्वारा उक्त अवसर पर संग्रहालय में स्पेस आर्ट से सम्बन्धित चित्रों का भी प्रदर्शन किया गया। उक्त आयोजन के इस सीरीज में बनाई गई पहली पेंटिंग दस महाविद्या और ब्रम्ह्माण्ड की ऊर्जा को बताती है। ये पेंटिंग हाल ही मे कुछ कला प्रदर्शनियों का हिस्सा रही है। वहीं इस श्रृंखला की दूसरी पेंटिंग डॉ0 क्षितिज के ब्रम्हाण्ड का हिस्सा बनने जा रही है, जो आधुनिक बिग बैंग थ्योरी और पौराणिक हिरण्यगर्भ जैसे विषय पर बन रही है।
 
इसी दौरान नक्षत्रशाला के खगोलविद् अमर पाल सिंह ने कहा कि ब्रहमाण्ड सभी के लिए है और डाॅ0 हाशिमा हसन जैसे व्यक्तित्व की लगन, समर्पण और रिसर्च से प्रेरणा लेकर के विद्यार्थियों को भावी भविष्य के वैज्ञानिक बनने के लिए एक मार्गदर्शक के तौर पर उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व अपने आप में बहुत कुछ सीखने, जानने एवं समझने योग्य है। जैसे कि उन्होंने हबल स्पेस टेलीस्कोप एवं जेम्स बेव स्पेस टेलीस्कोप जैसे प्रोजेक्ट में बतौर सीनियर साइन्टिस्ट कार्य करते हुए जे.डब्ल्यू. एस.टी. से प्राप्त अन्तरिक्ष की तस्वीरों आदि को अन्वेषित करके दुनिया को वह दिखाया है जो शायद हम कभी नहीं देख पाते।
 
कार्यक्रम के अन्त में संग्रहालय के उप निदेशक डाॅ0 यशवन्त सिंह राठौर ने कहा कि संग्रहालय विद्यार्थियों के लिए समय-समय पर विविध शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है। इसी कड़ी में सुष्मिता सिंह बक्की के प्रयासों से आज नासा की साइन्टिस्ट डाॅ0 हाशिमा हसन से समन्वय स्थापित कर बौद्ध संग्रहालय में अन्तरिक्ष में मानव से सम्बन्धित विषय पर इस तरह ही कार्यशाला का आयोजन में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलवाना अपने आप में एक अद्वितीय एवं सराहनीय प्रयास रहा है। जो निश्चय ही खासकर छात्राओं के लिए एक प्रेरणात्मक पहल है।
 
डाॅ0 राठौर ने कहा कि डाॅ0 हाशिमा हसन जैसी प्रतिभाओं का नासा से गोरखपुर बौद्ध संग्रहालय में आना और छात्र-छात्राओं के मध्य सीधा संवाद करना तथा अन्तरिक्ष सम्बन्धी प्रश्नों से सम्बन्धित जिज्ञासाओं को शांत करना निश्चित तौर पर हम सब अन्तरिक्ष प्रेमियों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
 
कार्यक्रम का संचालन शिवनाथ एवं प्रभाकर शुक्ला द्वारा किया गया। उक्त अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के अध्यापकों सहयोग उल्लेखनीय रहा।
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